बीएचयू के प्रो. प्रवेश कुमार श्रीवास्तव लिस्बन विश्वविद्यालय पुर्तगाल में करेंगे शोध, मिला शैक्षणिक आमंत्रण
—पुर्तगाली अभिलेखों के प्राथमिक स्रोतों के आधार पर भारत–पुर्तगाल ऐतिहासिक आख्यानों के पुनर्निर्माण” विषय पर अनुसंधान करेंगे
वाराणसी, 26 मई (हि.स.)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ आचार्य, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवेश कुमार श्रीवास्तव लिस्बन विश्वविद्यालय पुर्तगाल में शोध करेंगे। शोध कार्य के लिए प्रो. श्रीवास्तव को लिस्बन विश्वविद्यालय ने आमंत्रित किया है।
लिस्बन विश्वविद्यालय के कला संकाय की ओर से आयोजित छह सप्ताह की विशेष शोध एवं शैक्षणिक कार्यशाला में प्रो. प्रवेश पुर्तगाली अभिलेखों के प्राथमिक स्रोतों के आधार पर भारत–पुर्तगाल ऐतिहासिक आख्यानों के पुनर्निर्माण” विषय पर अनुसंधान करेंगे। यह शोध प्रवास 9 जून 2026 से प्रारम्भ होगा। मंगलवार को यह जानकारी बीएचयू के जनसम्पर्क कार्यालय ने दी।
बताया गया कि लिस्बन विश्वविद्यालय का यह आमंत्रण प्रो. श्रीवास्तव के दीर्घ एवं गौरवशाली शैक्षणिक जीवन की एक और उल्लेखनीय उपलब्धि है। प्रो. श्रीवास्तव भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व के अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वान हैं। इससे पूर्व भी लिस्बन विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। साथ ही, यह आमंत्रण बीएचयू और लिस्बन विश्वविद्यालय के मध्य विद्यमान अकादमिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
उल्लेखनीय है कि प्रो. श्रीवास्तव अब तक एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया तथा उत्तर अमेरिका सहित लगभग बीस देशों की अकादमिक यात्राएँ कर चुके हैं तथा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, पुर्तगाल, जापान, चीन और अन्य यूरोपीय देशों के विश्वविद्यालयों एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्याख्यान, शोध-पत्र प्रस्तुति तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित होते रहे हैं। काशी की विद्वत् परंपरा के एक प्रतिनिधि स्वर के रूप में प्रो. श्रीवास्तव की यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय अकादमिक जगत के लिए गौरव का विषय है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी