बीएचयू में ‘माइंडफुलनेस और आत्म-अन्वेषण’ पर संवादात्मक सत्र, विद्यार्थियों को बताए तनाव प्रबंधन के उपाय

 


वाराणसी, 26 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वेलबीइंग सर्विसेज सेल की ओर से सोमवार को ‘माइंडफुलनेस और आत्म-अन्वेषण : अमेरिका से सीख’ विषय पर संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इसमें अमेरिका के ओहायो स्थित ओटरबाइन विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की प्रो. डायने रॉस ने विद्यार्थियों से संवाद कर आत्म-जागरूकता, व्यक्तिगत विकास और मानसिक कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला।

सत्र के दौरान प्रो. रॉस ने दैनिक जीवन में बढ़ते तनाव को प्रबंधित करने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और जीवन के प्रति सकारात्मक एवं सजग दृष्टिकोण विकसित करने के व्यावहारिक उपाय साझा किए। उन्होंने अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न लोगों, संस्कृतियों और जीवन परिस्थितियों के साथ हमारा जुड़ाव हमारी सोच को व्यापक बनाता है। ऐसे अनुभव स्वयं को बेहतर ढंग से समझने और आत्म-विकास की दिशा में आगे बढ़ने में सहायक होते हैं।

प्रो. रॉस ने माइंडफुलनेस को वर्तमान क्षण के प्रति सजग और निष्पक्ष जागरूकता के रूप में समझाया। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से सजगता का अभ्यास करने से एकाग्रता बढ़ाने, भावनाओं को संतुलित रखने और सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। उन्होंने अपने शैक्षणिक एवं अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर जिज्ञासा, सहानुभूति, ध्यानपूर्वक सुनने और विविध दृष्टिकोणों का सम्मान करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे माइंडफुलनेस को केवल व्यक्तिगत अभ्यास तक सीमित न रखें, बल्कि इसे दूसरों की भावनाओं और विचारों को समझने तथा सार्थक संबंध विकसित करने का माध्यम भी बनाएं। उनके अनुसार, आत्म-अन्वेषण की प्रक्रिया व्यक्ति को अपनी सोच, भावनाओं और व्यवहार को समझने के साथ ही जीवन के प्रति अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने में मदद करती है।

प्रश्नोत्तर के माध्यम से विद्यार्थियों ने साझा किए विचार

सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और विषय से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। प्रो. रॉस ने उनके सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए माइंडफुलनेस और आत्म-चिंतन के व्यावहारिक पहलुओं को स्पष्ट किया। इस संवादात्मक आयोजन ने विद्यार्थियों को आत्म-अन्वेषण, आत्म-चिंतन और सजग जीवनशैली के महत्व को समझने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय अनुभवों एवं दृष्टिकोणों से सीखने का अवसर प्रदान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी