बीएचयू और किसान उत्पादन संगठन चोलापुर के बीच एमओयू, लाभान्वित हाेंगे किसान

 


—प्राकृतिक खेती, संरक्षित खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली पर संयुक्त रूप से कार्य

वाराणसी, 20 अप्रैल (हि.स.)। किसानों के बीच विकसित तकनीकी के प्रयोग, कृषि विज्ञान के कौशल और क्षमता को बढ़ावा देने तथा बागवानी में उन्नति के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय निरंतर प्रयास में जुटा है। इन्हीं प्रयासों में सोमवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा किसान उत्पादन संगठन चोलापुर कल्याण फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मध्य कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर केन्द्रीय कार्यालय में हस्ताक्षर किये गए।

इस समझौते के अंतर्गत, दोनों पक्ष प्राकृतिक खेती, संरक्षित खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, शहरी बागवानी एवं सटीक बागवानी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। साथ ही, संसाधन संरक्षण तकनीकों, जैविक खेती तथा नवीन कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने हेतु अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों को भी गति दी जाएगी।

बीएचयू कुलसचिव प्रो.अरूण कुमार सिंह के अनुसार, समझौते के मुख्य उद्देश्यों में किसानों एवं विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षमता निर्माण, इंटर्नशिप, फील्ड एक्सपोजर तथा ‘कर के सीखने’ आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री की उपलब्धता, उत्पादन का मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग एवं विपणन को विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पहल के अंतर्गत कृषि आधारित उद्यमों जैसे मत्स्य पालन, मुर्गी पालन एवं मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, स्मार्ट कृषि तकनीकों—जैसे सेंसर आधारित सिंचाई, डिजिटल फसल निगरानी एवं आईसीटी/जीआईसी आधारित निर्णय सहयोग प्रणाली—को अपनाने पर बल दिया जाएगा।

कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में कुलसचिव प्रो. अरूण कुमार सिंह एवं चोलापुर कल्याण फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक शैलेंद्र रघुवंशी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। इस साझेदारी के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत उत्पादन विधियों और बाजार से जुड़ने के प्रभावी तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि कृषि उत्पादन के साथ साथ बाजार को समझना भी अत्यंत आवश्यक है। यदि बाज़ार को समझ कर उत्पादन किया जाएगा तो यह किसानों के लिए काफी हितकर होगा। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा किये गए अनुसंधान व तकनीकी विकास को किसानों के माध्यम से खेतो तक ले जाया जाना चाहिए। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि अच्छे उत्पादन की बेहतर ब्रांडिंग और मार्केटिंग भी ज़रूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस संबंध में बीएचयू के प्रबंध शास्त्र संस्थान के साथ भी सहयोग किया जा सकता है। कुलपति ने चोलापुर कल्याण फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में एफपीओ के काम से किसान लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि यह समझौता केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि इसका प्रभाव ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

कंपनी के निदेशक शैलेंद्र रघुवंशी ने कहा कि यह समझौता किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इसके माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और बेहतर बाजार से जुड़ने के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू. पी. सिंह, उद्यान विशेषज्ञ इकाई के प्रभारी प्रो. सरफराज आलम, उद्यान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल के. सिंह तथा विभाग से ही डॉ. कल्याण बर्मन, कृषि अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. राकेश सिंह, मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के डॉ. आर. मीणा आदि भी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी