विश्वविद्यालय जैसी विशाल व्यवस्था में प्रभावी संवाद अति आवश्यक : प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी
——बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान का वार्षिक दिवस समारोह
वाराणसी, 15 मई (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि युवा वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों की ऊर्जा, नवाचार और समर्पण विकसित भारत–2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कुलपति शुक्रवार को कृषि विज्ञान संस्थान के वार्षिक दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संस्थान को वार्षिक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कृषि को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक सेवा के एक सशक्त साधन के रूप में अपनाएं। उन्होंने संकायों, विभागों एवं विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नवाचारपूर्ण सुझाव एवं प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के पास सुदृढ़ प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था है, जिसके माध्यम से अधिकांश निर्णय स्वतंत्र रूप से लिए जा सकते हैं। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसी विशाल व्यवस्था में प्रभावी संवाद अति आवश्यक है । शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों से औपचारिक एवं उत्तरदायी संवाद के लिए आधिकारिक डोमेन के ईमेल के अधिकाधिक उपयोग का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप जैसे माध्यम अनौपचारिक संवाद के लिए उपयोगी हैं, किंतु ई-मेल के माध्यम से संवाद अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी निरन्तरता प्राप्त करता है। इसके पहले संस्थान के निदेशक एवं संकाय प्रमुख प्रो. यू.पी. सिंह ने स्वागत भाषण दिया। प्रो. सिंह ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए बताया कि कृषि संस्थानों की एनआईआरएफ रैंकिंग में संस्थान ने चौथा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संस्थान को कृषि अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए “क्लैरिवेट इंडिया रिसर्च एक्सीलेंस साइटेशन अवार्ड 2025” सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। वर्ष 2025-26 में संस्थान के वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों द्वारा 312 शोध पत्र, 77 पुस्तक अध्याय एवं 11 पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। संस्थान को लगभग 35 करोड़ रुपये की 20 शोध परियोजनाएं प्राप्त हुईं तथा 10 पेटेंट दाखिल किए गए, जिनमें से सात स्वीकृत हो चुके हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि संस्थान द्वारा “मालवीय निधि” सरसों, “मालवीय मनीला सिंचित धान-1” तथा “मालवीय धान 105 सब-1” सहित अनेक नई एवं उन्नत फसल प्रजातियों का विकास किया गया है। पशुपालकों के लिए “गोट गुरु” एवं “कैटल गुरु” नामक द्विभाषी मोबाइल अनुप्रयोग भी विकसित किए गए हैं, जिनके माध्यम से पशुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां सुलभ कराई जा रही हैं। साथ ही उन्नत भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के माध्यम से साहीवाल नस्ल के छह स्वस्थ बछड़ों का सफल जन्म भी कराया गया। समारोह में उद्यान विज्ञान विभाग के डॉ. अनिल कुमार सिंह की लिखित पुस्तक “फूलों की वैज्ञानिक खेती” का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक की भूमिका कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने लिखी है।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. अमिताव रक्षित, प्रो. अभिषेक सिंह एवं डॉ. पुष्यमित्र त्रिवेदी के संयोजन में पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकगण एवं कर्मचारियों की उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। संचालन दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. अंकिता हुड्डा तथा पादप शरीर क्रिया विज्ञान विभाग के डॉ. विजई पांडुरंगम ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी