बीएचयू हृदय रोग विभाग काे मिली उन्नत इकोकार्डियोग्राफी प्रयोगशाला एवं फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन
— देश के सरकारी संस्थानों में दूसरी तथा उत्तर प्रदेश में पहली,भ्रूण के हृदय की विस्तृत इमेजिंग एवं आकलन में सक्षम अत्याधुनिक मशीन
वाराणसी, 11 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू )चिकित्सा विज्ञान संस्थान के हृदय रोग विभाग में दो नई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं स्थापित की गई हैं। इन सुविधाओं में फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन तथा उन्नत इकोकार्डियोग्राफी प्रयोगशाला शामिल हैं। इनके माध्यम से हृदय रोगियों के लिए उन्नत हृदय संबंधी निदान सेवाओं के साथ-साथ भ्रूण के हृदय की विशेष जाँच की सुविधा का विस्तार होगा। मंगलवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने इन सुविधाओं का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि किसी चिकित्सा केंद्र की प्रतिष्ठा केवल उपचार किए गए मरीजों की संख्या से निर्धारित नहीं होती, बल्कि वहाँ इलाज के मामलों की गुणवत्ता एवं जटिलता, अपनाई जाने वाली नवीन प्रक्रियाओं तथा नैदानिक सेवाओं की निरंतर नई सीमाएँ निर्धारित करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। चिकित्सा विज्ञान संस्थान में जटिल हृदय रोगों के उपचार की संस्थागत क्षमता विकसित करना प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। हृदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विकास अग्रवाल ने विभाग में उन्नत निदान एवं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सेवाओं के विस्तार पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आज उद्घाटित हुई सुविधाओं से पूर्वांचल सहित बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड तथा नेपाल के मरीज विशेष रूप से लाभान्वित होंगे क्योंकि उन्हें इन उन्नत एवं विशेषीकृत हृदय चिकित्सा सेवाओं के लिए महानगरों तक नहीं जाना होगा। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीक से युक्त फीटल इकोकार्डियोग्राफी मशीन भारत के सरकारी क्षेत्र में स्थापित होने वाली इस प्रकार की दूसरी तथा उत्तर प्रदेश में पहली ऐसी मशीन है। यह प्रणाली विकसित हो रहे भ्रूण के हृदय के विस्तृत आकलन के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इसके माध्यम से भ्रूण के हृदय की त्रि-आयामी (3D) इमेजिंग तथा हृदय के विभिन्न भागों एवं प्रमुख धमनियों का विस्तृत आकलन किया जा सकता है। इसकी उन्नत इमेजिंग एवं स्वीपिंग तकनीक के माध्यम से हृदय की अत्यंत सूक्ष्म संरचनात्मक असामान्यताओं की भी पहचान की जा सकती है।
हृदय रोग विभाग के अनुसार, फीटल इकोकार्डियोग्राफी के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान जन्मजात हृदय विकारों की प्रारंभिक पहचान एवं आकलन संभव होता है। भ्रूण के हृदय का विकास गर्भावस्था के प्रारंभिक सप्ताहों में ही शुरू हो जाता है, जबकि इसकी विस्तृत हृदय संबंधी जाँच सामान्यतः लगभग 18वें सप्ताह से की जा सकती है। यह सुविधा चिकित्सकों को भ्रूण में हृदय संबंधी असामान्यताओं की प्रारंभिक अवस्था में पहचान एवं उनका स्वरूप का पता लगाने में सहायता करेगी। इससे गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को समय पर परामर्श तथा गर्भावस्था के उचित प्रबंधन में सहायता मिल सकेगी। इन उन्नत इकोकार्डियोग्राफी प्रयोगशाला में उच्च क्षमता वाली चार-आयामी (4D) इकोकार्डियोग्राफी मशीन स्थापित की गई है। इसमें त्रि-आयामी (3D) ट्रांसइसोफेगल एवं ट्रांसथोरेसिक इकोकार्डियोग्राफी, स्ट्रेन इमेजिंग, स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राफी तथा कॉन्ट्रास्ट इकोकार्डियोग्राफी सहित विभिन्न प्रकार की जाँच सुविधाएँ उपलब्ध हैं। मशीन में वयस्क हृदय रोगों के निदान तथा उनके उपचार में सहायता प्रदान करने वाली सभी प्रमुख विधियाँ उपलब्ध हैं। डॉ. सुयश त्रिपाठी हृदय रोगों से पीड़ित मरीजों पर अनुसंधान के लिए इस मशीन का उपयोग कर रहे हैं।
उद्घाटन समारोह का समन्वय हृदय रोग विभाग के डॉ. उमेश पांडेय, डॉ. सौमिक घोष तथा डॉ. राजपाल प्रजापति ने किया। डॉ. प्रतिभा राय ने फीटल इकोकार्डियोग्राफी की विभिन्न तकनीकी विशेषताओं की जानकारी दी । इस अवसर पर प्रो. एस. एन. संखवार, निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान ने हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोगों के बढ़ते भार को देखते हुए इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सेवाओं को सुदृढ़ करने के महत्व पर चर्चा की। प्रो. पुनीत, चिकित्सा अधीक्षक, सर सुंदरलाल चिकित्सालय ने नवनिर्मित सुविधाओं के महत्व पर चर्चा करते हुए बाल हृदय चिकित्सा सेवाओं के भावी विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बाल हृदय चिकित्सा इकाई के माध्यम से जन्मजात एवं अन्य हृदय रोगों से पीड़ित बच्चों के लिए विशेषीकृत चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होगा तथा चिकित्सालय द्वारा बच्चों को विशेष हृदय चिकित्सा उपलब्ध कराने की क्षमता सुदृढ़ होगी। डॉ. अजित सिंह, आचार्य प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाएँ तभी सार्थक है, जब वह मरीजों तक समय पर और प्रभावी रूप से पहुँच सके।”
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी