बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में पहली बार स्पाइन कैडेवर कोर्स की शुरूआत

 


—संस्थान में शल्य शिक्षा को सुदृढ़ बनाने, स्पाइन चिकित्सा विशेषज्ञता को आगे बढ़ाने की दिशा में पहल

वाराणसी, 18 अप्रैल (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में शनिवार को पहली बार बीएचयू स्पाइन कैडेवर कोर्स-2026 का आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय पाठ्यक्रम का विषय थोरेको-लम्बर,लम्बर स्पाइन था।

विश्वविद्यालय में पहली बार स्पाइन विषय पर कैडेवर आधारित पाठ्यक्रम आयोजित किया गया हैं जो स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल है। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संस्थान के एनाटॉमी विभाग के डिसेक्शन हॉल में कैडेवर कोर्स का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय में पहली बार रीढ़ शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में इस प्रकार का विशिष्ट पाठ्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि कैडेवर पर प्रशिक्षण से विद्यार्थियों और चिकित्सकों को वास्तविक शल्य प्रक्रिया के निकट अनुभव प्राप्त होता है, जो सामान्य सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण से अधिक उपयोगी है। उन्होंने संस्थान द्वारा शुरु किए गए इस पहल की सराहना की तथा भविष्य में ऐसे सभी शैक्षणिक प्रयासों को संसाधन, वित्तीय सहयोग और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के माध्यम से समर्थन देने का सुझाव दिया।

उद्घाटन समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार ने अस्थि रोग विभाग तथा एनाटॉमी विभाग को इस पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान चिकित्सा परिदृश्य में ऐसे व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है। चिकित्सा संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने भविष्य में भी इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों के आयोजन का सुझाव दिया। अस्थि रोग विभाग द्वारा एनाटॉमी विभाग के सहयोग से आयोजित इस पाठ्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से आए लगभग 50 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इनमें अस्थि रोग विशेषज्ञ, स्पाइन विशेषज्ञ, इंटर्न तथा स्पाइन चिकित्सा से जुड़े अन्य चिकित्सक सम्मिलित रहे। पाठ्यक्रम के दौरान थोरेकोलम्बर एवं लम्बर स्पाइन की संरचना, लम्बर डिस्केक्टॉमी, लम्बर डीकम्प्रेशन, पेडिकल स्क्रू प्रत्यारोपण, लम्बर फ्यूजन, इलियक स्क्रू तकनीक तथा क्लिनिकल एनाटॉमी जैसे प्रमुख विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम में वास्तविक शारीरिक संरचना आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण पद्धति अपनाई गई। प्रतिभागियों को इस उद्देश्य के लिए दान किए गए वास्तविक कैडेवर पर कार्य करने का अवसर मिला, जिससे उन्हें उन्नत शल्य प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ तथा जटिल मामलों के प्रभावी प्रबंधन की समझ विकसित हुई। आयोजन समिति के आयोजक अध्यक्ष प्रो. अजीत सिंह, अस्थि रोग विभाग ने अतिथियों का स्वागत व आयोजक सचिव एसोसिएट प्रोफेसर संजय यादव धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी