बीएचयू में पहली बार मिनिमली इनवेसिव कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी
——छाती खोले बिना महज 8 सेंटीमीटर के चीरे से हुई सफल सर्जरी, पांचवें दिन मरीज को मिली छुट्टी
वाराणसी, 18 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल चिकित्सालय के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने पहली बार मिनिमली इनवेसिव कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (एमआईसीएस-सीएबीजी) सफलतापूर्वक की है। सामान्य बोलचाल में इसे ‘की-होल कार्डियक सर्जरी’ भी कहा जाता है। विभाग के अनुसार, सर सुंदरलाल चिकित्सालय के साथ-साथ पूर्वांचल में भी इस तकनीक से सीएबीजी सर्जरी पहली बार अस्पताल की अपनी टीम ने की है।
यह सर्जरी सीटीवीएस विभाग में डॉ. अरविंद पांडेय के नेतृत्व में की गई। वाराणसी निवासी 52 वर्षीय मरीज के हृदय की धमनियों में गंभीर और कैल्सीफाइड ब्लॉकेज था। इसके कारण मरीज को बार-बार सीने में दर्द और हृदयाघात की समस्या हो रही थी। आवश्यक जांच के बाद चिकित्सकों ने मरीज को मिनिमली इनवेसिव कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी की सलाह दी।
सामान्य कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी में छाती की मध्य अस्थि (स्टर्नम) को काटकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है। इसके विपरीत मिनिमली इनवेसिव तकनीक में स्टर्नम को काटे बिना पसलियों के बीच छोटे चीरे के माध्यम से सर्जरी की जाती है। इस मरीज में बाईं ओर की पसलियों के बीच लगभग 8 सेंटीमीटर के छोटे चीरे से बाईपास सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई।
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और उन्हें ऑपरेशन के पांचवें दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। विभाग के अनुसार, सर्जरी के बाद तीन से चार फॉलोअप में मरीज की स्थिति सामान्य रही और वह अब सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
——कम दर्द और तेजी से रिकवरी
मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी में ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे मरीज को अपेक्षाकृत कम दर्द, छोटा सर्जिकल निशान और तेजी से रिकवरी जैसे लाभ मिलते हैं। विभाग के अनुसार, उपयुक्त मरीजों में इस तकनीक के माध्यम से सामान्य जीवनशैली में वापसी भी अपेक्षाकृत जल्दी हो सकती है।
यह सुविधा अब तक मुख्य रूप से बड़े महानगरों के चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध थी। सर सुंदरलाल चिकित्सालय में इसके शुरू होने से पूर्वांचल के मरीजों को इस आधुनिक तकनीक का लाभ स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा।
—सीटीवीएस विभाग में कई जटिल सर्जरी नियमित
सर सुंदरलाल चिकित्सालय के सीटीवीएस विभाग में ओपन हार्ट सर्जरी के तहत कोरोनरी बाईपास सर्जरी, वाल्व प्रत्यारोपण, जन्मजात हृदय रोगों जैसे एएसडी, वीएसडी और टीओएफ, री-डू ओपन हार्ट सर्जरी, रक्त वाहिकाओं तथा महाधमनी से संबंधित सर्जरी नियमित रूप से की जाती हैं। इसके अलावा हृदय के वाल्व और जन्मजात हृदय रोगों से संबंधित कई शल्यक्रियाएं मिनिमली इनवेसिव तकनीक से भी की जा रही हैं।
इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली सीटीवीएस टीम में डॉ. नरेंद्र नाथ दास और डॉ. किनीशों शामिल रहे। एनेस्थिसियोलॉजी टीम की ओर से डॉ. संजीव, डॉ. सोनल और डॉ. सोरिंग ने सहयोग किया।
परफ्यूजनिस्ट के रूप में दिनेश मैती, सौम्यजीत और आशुतोष ने योगदान दिया।
ऑपरेशन थिएटर (ओटी) नर्सिंग अधिकारियों में त्रिवेंद्र त्यागी, आनंद कुमार, राहुल, मुकेश, संजय, सत्येंद्र और सुतापा पॉल शामिल रहे।
ओटी तकनीकी सहायकों के रूप में बैजनाथ पाल और ओम प्रकाश पटेल, जबकि वार्डबॉय के रूप में अरविंद ने सहयोग किया।
इस उपलब्धि में सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया तथा एनेस्थिसियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. ए.पी. सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी