देश में वैचारिक, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक चेतना का वातावरण बनाने में संत समाज की भूमिका अहम : चंपत राय
वाराणसी, 04 नवंबर (हि.स.)। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि सरकार आर्थिक विकास और शिक्षा के प्रसार के लिए प्रयास कर सकती है, लेकिन देश में वैचारिक एवं सांस्कृतिक एकता तथा सामाजिक चेतना का वातावरण तैयार करने में संत समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। संत समाज कठिन परिस्थितियों में लोगों का मनोबल बढ़ाने के साथ ही समाज को सही दिशा देने का कार्य कर सकता है।
चंपत राय बुधवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित संस्कृति संसद के दूसरे दिन के सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को गुमराह कर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसी ताकतों के प्रति समाज को सजग रहने और देश को उनसे बचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने भारत के ऐतिहासिक वैभव और संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने इतिहास में अनेक आर्थिक एवं राजनीतिक संकटों का सामना किया, लेकिन अपनी मजबूती और आत्मनिर्भरता बनाए रखी। मौर्यकाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि करीब दो हजार वर्ष पूर्व भारत आर्थिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध था। उस दौर में जब दुनिया के कई हिस्से आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, तब भी भारत अपनी आर्थिक मजबूती के बल पर खड़ा रहा। भारत की संपन्नता के कारण आर्थिक अभाव से जूझ रहे बाहरी समूहों ने यहां आक्रमण कर लूटपाट की।
चंपत राय ने कहा कि भारत ने विभिन्न आक्रमणों और चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। उन्होंने आठवीं शताब्दी में सिंध पर हुए आक्रमण, महमूद गजनवी के हमलों तथा 12वीं शताब्दी में मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच हुए संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद देश में राजनीतिक पतन की प्रक्रिया तेज हुई और विभिन्न शासकों ने अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए हिंसा तथा कत्लेआम का सहारा लिया।
उन्होंने पुर्तगाली शासनकाल के दौरान गोवा में हुए अत्याचारों का भी उल्लेख किया। चंपत राय ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में जागरूकता बढ़ी है। ऐसे में महापुरुषों के प्रति अनादर और उनके गौरवशाली इतिहास को कमतर दिखाने के प्रयास सफल नहीं हो सकते। शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप जैसे महान योद्धाओं के प्रति समाज की श्रद्धा और सम्मान लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने संत समाज से सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी