वाराणसी : मौनी अमावस्या पर रविवार भोर से ही श्रद्धालु गंगा में लगाएंगे आस्था की डुबकी

 


—इस बार सर्वार्थ सिद्धि,हर्षण और शिव वास योग में श्रद्धालु स्नान दान करेंगे

वाराणसी, 17 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में माघ माह के मौनी अमावस्या को लेकर सनातनी श्रद्धालुओं में गंगा स्नान को लेकर जबरदस्त उत्साह है। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के अनुसार माघ मास की मौनी अमावस्या की शुरूआत शनिवार देर रात 12:04 मिनट से हो रही है। जबकि इसकी समाप्ति 19 जनवरी की मध्यरात्रि 1:22 बजे होगी। इस प्रकार मौनी अमावस्या की सम्पूर्ण अवधि 25 घंटे 18 मिनट की रहेगी।

धर्मशास्त्रों में प्रतिपादित सूत्र— “उदये याऽतिभास्करः सा तिथिः सकला ज्ञेया ज्ञानदानजपादिषु” के आलोक में यह स्पष्ट होता है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है, वही तिथि ज्ञान, दान, जप, तप एवं स्नानादि के लिए पूर्ण फलदायी मानी जाती है। इस शास्त्रीय प्रमाण के अनुसार 18 जनवरी रविवार को सम्पूर्ण दिन मौनी अमावस्या के पुण्य कर्म सम्पन्न किए जा सकते हैं।

कुलपति प्रो शर्मा ने बताया कि इसके अतिरिक्त, अमावस्या का प्रभाव 19 जनवरी 2026 को सूर्योदय के पश्चात दो घटी (48 मिनट), अर्थात् प्रातः 7:28 बजे तक बना रहेगा। अतः इस अवधि में भी स्नान, दान एवं जपादि कर्म विशेष फलप्रद होंगे।

——शुभ-अशुभ काल का वर्गीकरण

ज्योतिषीय दृष्टि से इस अमावस्या के विभिन्न काल

—17/18 जनवरी (रात्रि 12:04 से प्रातः 5:58) — मध्यम

—18 जनवरी (प्रातः 5:59 से मध्यान्ह 11:55) — उत्तम

—18/19 जनवरी (मध्यान्ह 11:56 से सायं 4:39) — मध्यम

—19 जनवरी (प्रातः 5:58 से 7:28) उत्तम

प्रो.शर्मा ने बताया कि विशेष रूप से 18 जनवरी को प्रातःकाल से मध्यान्ह तक का समय स्नान-दान एवं धार्मिक अनुष्ठानों हेतु अत्यन्त श्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मौनी अमावस्या को एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग भी प्राप्त हो रहा है। मकर राशि में सूर्य एवं चन्द्रमा का संयोग उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में दिनांक 18 जनवरी 2026 को सायं 4:41 बजे से रात्रि 1:22 बजे तक रहेगा। इस अवधि में लगभग 8 घंटे 30 मिनट का ‘अमृत स्नान काल’ प्राप्त हो रहा है। विशेषतः सायं 4:41 से रात्रि 9:23 बजे तक ‘हर्षण योग’ का निर्माण हो रहा है, जो स्नान, दान, जप एवं आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यन्त लाभप्रद एवं पुण्यवर्धक माना गया है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस पावन अवसर पर मौन व्रत का पालन, गंगा स्नान, तिल-दान, वस्त्र-दान, अन्न-दान तथा ब्राह्मण सेवा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सनातन धर्म में मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों खास कर गंगा में स्नान, दान, पूजा और मौन व्रत करने से मन शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इस दिन मौन का पालन करने से मन, वाणी और विचारों की शुद्धि होती है। मौन व्रत व्यक्ति को आत्मचिंतन और संयम की ओर प्रेरित करता है। साथ ही अमावस्या तिथि पितरों से जुड़ी होने के कारण इस दिन तर्पण और दान करने का विशेष फल बताया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी