अनंत चतुर्दशी का पर्व श्रद्धा के साथ मना,महिलाओं ने भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की किया आराधना

 


वाराणसी,25 सितंबर (हि.स.)। भाद्रपद मास की चतुर्दशी तिथि पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में अनंत चतुर्दशी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। बारिश के रिमझिम फुहारों के बीच लक्ष्मीकुंड पर व्रती महिलाओं के साथ उनके परिजन जुटे। लक्ष्मी कुंड के समीप महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना की और उनकी कथा सुनी। इसके बाद लक्ष्मी मंदिर में दर्शन-पूजन और आरती कर सुख-समृद्धि की कामना की।

बताते चले सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी पर्व पर भगवान विष्णु की पूजा और आरती का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और अनंत भगवान की आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। पूजा के दौरान व्रती महिलाओं ने भगवान विष्णु को समर्पित अनंत सूत्र भी धारण किया। मान्यता है कि इस पवित्र सूत्र में भगवान विष्णु का वास होता है। पूजा-अर्चना के बाद इसे बाजू पर बांधा जाता है।

अनंत सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं, जिन्हें 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। लक्ष्मी कुंड पर सुबह से ही पूजा-पाठ का सिलसिला चलता रहा। महिलाओं ने विधि-विधान से अनंत भगवान की आराधना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सुरक्षा की कामना की।

नगर के युवा ज्योतिषविद आचार्य रविन्द्र तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी तिथि का काफी महत्व माना जाता है। पंचांग के हिसाब से हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को 'अनंत चतुर्दशी' का पर्व मनाया जाता है। अनंत चतुर्दशी का व्रत चराचर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। भगवान अनंत की आराधना कर रेशम, कुशा सूती के सूत्र में 14 गांठें लगाई जाने की परंपरा निभाई जाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी