अमिताभ ठाकुर मामले में वाराणसी पुलिस को स्पष्ट जांच आख्या रिपोर्ट पेश करने का आदेश

 


— पूर्व आईपीएस के अधिवक्ता ने पुलिस की अस्पष्ट रिपोर्ट पर उठाया सवाल, दाखिल की आपत्ति

वाराणसी, 05 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में वाराणसी जिले के चौक थाने में दर्ज एक मामले में आजाद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने बुधवार को चौक पुलिस को स्पष्ट जांच आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पुलिस से 11 अगस्त तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई भी उसी दिन निर्धारित की है।

अमिताभ ठाकुर की ओर से उनके अधिवक्ता अनुज यादव ने अदालत में पुलिस द्वारा प्रस्तुत जांच आख्या पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि विवेचक ने 25 जुलाई 2026 को जो रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की है, वह अस्पष्ट है और उसमें जांच की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने दलील दी कि प्रार्थना पत्र में उठाए गए महत्वपूर्ण बिंदुओं का अब तक समुचित उत्तर नहीं दिया गया है, इसलिए मामले में न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है। अधिवक्ता ने अदालत से पुलिस को स्पष्ट और विस्तृत जांच आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश देने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को स्पष्ट जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त के लिए नियत कर दी।

गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि दिसंबर 2025 में चौक थाने में उनके विरुद्ध दर्ज मुकदमे में छह माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो जांच पूरी की गई और न ही सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि मुकदमा दर्ज होने के कुछ ही दिनों के भीतर उनकी न्यायिक हिरासत की मांग की गई थी, लेकिन आठ माह बीत जाने के बाद भी विवेचना लंबित है और पुलिस अब तक अपने कानूनी दायित्व का निर्वहन नहीं कर सकी है।

उल्लेखनीय है कि वाराणसी के बड़ी पियरी निवासी एवं हिन्दू युवा वाहिनी के मंडल प्रभारी अम्बरीष सिंह 'भोला' की तहरीर पर 9 दिसंबर 2025 को चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अमिताभ ठाकुर ने 30 नवंबर 2025 को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट कर उन पर विभिन्न आपराधिक मामलों में संलिप्त होने के निराधार आरोप लगाए। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप था कि बहुचर्चित कफ सिरप प्रकरण में बिना किसी साक्ष्य के उनका नाम जोड़ते हुए भ्रामक और तथ्यहीन सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसी शिकायत के आधार पर चौक पुलिस ने पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर तथा एक अन्य के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी