आद्य शंकराचार्य की 2533वीं जयन्ती काशी में मनी,श्री काशी विश्वनाथ धाम में रचित स्तोत्रों का हुआ पाठ

 


वाराणसी, 21 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में आद्य शंकराचार्य की 2533वीं जयन्ती मंगलवार को मठों और मंदिरों में उल्लासपूर्ण माहौल में मनाई गई। जयंती पर काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में प्रो. सिद्धिदात्री के मार्गदर्शन में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के समक्ष बैठकर उनके द्वारा रचित स्तोत्रों का भावपूर्ण पाठ किया।

कार्यक्रम का प्रारंभ गणेश पंचरत्नम् के पाठ से हुआ, तत्पश्चात अन्नपूर्णा स्तोत्रम्, शिव मानस पूजन, वेद शरणम् शिव स्तुति, भवान्यष्टकम्, निर्वाणषट्कम् तथा दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम् का क्रमबद्ध रूप से उच्चारण किया गया। विद्यार्थियों ने पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ इन स्तोत्रों का पाठ कर वातावरण को आध्यात्मिक भाव से भर दिया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी इस आयोजन में सहभागिता कर आदि गुरु शंकराचार्य के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने इस प्रकार के आयोजन को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में शंकराचार्य का षोडशोपचार पूजन

आदि शंकराचार्य की 2533वीं जयंती केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ में भी पूरे आस्था के साथ मनाई गई। श्रीविद्या मठ प्रांगण में शंकराचार्य के भक्तों ने आदि शंकराचार्य का षोडशोपचार पूजन, अष्टोत्तर शतनाम से अर्चन किया। इसके बाद अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मंडल द्वारा शंकराचार्य द्वारा रचित भज गोविंदम् का पाठ किया गया। इस अवसर पर श्री काशी विदुषी परिषद् की सावित्री पाण्डेय ने कहा कि सनातन धर्म यदि सुरक्षित है तो आदि शंकराचार्य के कारण। उनके द्वारा दिया गए ज्ञान का उपदेश हम सभी को अपने जीवन में पालन करना चाहिए।

कार्यक्रम में अविनाश चन्द्र ने निर्वाण षट्कम् का पाठ किया। इसके बाद मौजूद लोगों ने भगवान शंकराचार्य का पूजन कर गौ माता राष्ट्र माता के अभियान की सफलता की प्रार्थना की। कार्यक्रम में मठ के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय,साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, आरती चन्द्र, हजारी कीर्ति नारायण शुक्ल आदि ने भागीदारी की।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी