शिक्षक दिवस पर पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर ने 11वीं एनडीआरएफ के बचावकर्मियों का बढ़ाया मनोबल

 


वाराणसी, 05 सितंबर (हि.स.)। शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शिक्षाविद, संगीतज्ञ पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर ने 11वीं एनडीआरएफ के मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों और बचावकर्मियों से संवाद किया। उन्होंने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में एनडीआरएफ कर्मियों के साहस, अनुशासन, समर्पण और मानवीय सेवा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

11वीं एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट ने मुख्यालय पहुंचने पर प्रो. मंगला कपूर का स्वागत किया। संवाद के दौरान प्रो. कपूर ने कहा कि आपदा की विषम परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना जरूरतमंद लोगों की सहायता करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण और सराहनीय कार्य है। एनडीआरएफ के बचावकर्मी जिस साहस और समर्पण के साथ मानव जीवन की रक्षा में जुटे रहते हैं, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

उन्होंने बचावकर्मियों को निरंतर सीखने, सकारात्मक सोच, अनुशासन और समर्पण के साथ राष्ट्र एवं मानवता की सेवा में कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया। प्रो. कपूर ने अपने जीवन के अनुभव और विचार साझा करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि ज्ञान, अनुशासन, सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का भी अवसर है।

उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में सीखने की प्रवृत्ति, सकारात्मक दृष्टिकोण और सेवा भावना व्यक्ति को बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने एनडीआरएफ कर्मियों को उनके दायित्वों के प्रति इसी भावना के साथ निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट ने प्रो. मंगला कपूर के 11वीं एनडीआरएफ मुख्यालय आगमन और उनके प्रेरणादायी विचार साझा करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पद्मश्री से सम्मानित प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं विदुषी का बचावकर्मियों के साथ संवाद उनके मनोबल, उत्साह और कर्तव्य के प्रति समर्पण को और मजबूत करने वाला है।

कार्यक्रम के दौरान 11वीं एनडीआरएफ के अधिकारियों एवं बचावकर्मियों ने प्रो. मंगला कपूर के साथ संवाद किया और उनके जीवन अनुभवों एवं विचारों से प्रेरणा ली। उनके प्रेरक संबोधन से बचावकर्मियों में सेवा, समर्पण और उत्कृष्टता की भावना और प्रबल हुई।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी