फतहां घाट पर सजी ‘विंध्य स्वर संध्या’, गंगा तट पर बिखरे शास्त्रीय संगीत के सुर
लोक और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों से देर रात तक गूंजता रहा घाटकलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को कराया काशी की सांस्कृतिक परंपरा का एहसास
मीरजापुर, 27 मई (हि.स.)। गंगा तट स्थित फतहां घाट बुधवार की शाम संगीत और संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। ‘विंध्य स्वर संध्या’ कार्यक्रम में लोक, उपशास्त्रीय और शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को देर तक बांधे रखा। गंगा किनारे खुले मंच पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों से हुई। घाट की सीढ़ियों पर बैठे श्रोताओं के बीच जब सुर और ताल की स्वर लहरियां गूंजीं तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भाव से सराबोर हो उठा। आयोजन में काशी की संगीत परंपरा और विंध्य क्षेत्र की लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।
पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र, पंडित देवव्रत मिश्र तथा तबला वादक प्रशांत मिश्र ने राग सरस्वती की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रूपक ताल और द्रुत तीन ताल की लयकारी ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
इसके बाद शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायिका विदुषी सुचरिता गुप्ता ने अपनी प्रस्तुति से महफिल को सुरमयी बना दिया।
आयोजन के दौरान घाट का दृश्य काशी के सांस्कृतिक आयोजनों की याद दिलाता रहा। गंगा के किनारे बैठे श्रोता और संगीत की गूंज ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इसे विंध्य क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा देने वाली पहल बताया।
इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा भी मौजूद रहे। उन्होंने मंच पर उपस्थित कलाकारों और अतिथियों का सम्मान किया। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हंसराज विश्वकर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में फतहां घाट पर नियमित रूप से सांस्कृतिक एवं संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा