मायके से चौथी लेकर पहुंचे ग्रामीण, भंडारी देवी धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब

 


- 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने टेका मत्था, हवन-पूजन के बाद चढ़ाई चुनरी; चौथी पहुंचते ही हुई झमाझम बारिश

मीरजापुर, 16 अगस्त (हि.स.)। भंडारी देवी धाम में रविवार को आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। पिछले मंगलवार को मां भंडारी देवी के मायके से विदा होकर आने के बाद भगवानपुर गांव के दर्जनों ग्रामीण रविवार को परंपरानुसार मां के लिए चौथी लेकर धाम पहुंचे। ग्रामीणों ने हवन-पूजन कर मां को चुनरी अर्पित की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

चौथी पहुंचने के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज से पहुंचे 50 हजार से अधिक भक्तों ने मां भंडारी देवी के चरणों में मत्था टेककर दर्शन-पूजन किया। श्रद्धालुओं ने मां को चुनरी, नारियल, लाचीदाना, माला और फूल अर्पित कर मनोकामना मांगी। कई श्रद्धालु अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराते भी नजर आए। भगवानपुर गांव से चौथी के रूप में बेसहनी, बताशा, चुनरी, चना और हवन सामग्री लेकर दूधनाथ, दरोगा, जवाहिर, भोनू यादव, बुल्लू यादव समेत दर्जनों ग्रामीण पहुंचे। हवन-पूजन के बाद मां को चुनरी चढ़ाई गई। चौथी पहुंचने के बाद अचानक बारिश शुरू हो गई। कुछ देर तक हुई अच्छी बारिश को श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद माना।

सेवा-भगत की परंपरा के तहत अहरौरा डीह के लोगों ने चौथीहारों की सेवा की। पूजा-अर्चना के बाद शाम को ग्रामीण चौथी लेकर वापस लौट गए।

मंदिर में श्रद्धालुओं ने मां की परिक्रमा की। मान्यता है कि मंदिर के पीछे स्थित ताखे पर भक्त अपनी मनोकामना के प्रतीक के रूप में पत्थर का टुकड़ा रखते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर उस पत्थर को ताखे से उतार लिया जाता है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं मां के चरणों में अर्पित करते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा