विजयादशमी पर विहिप-बजरंग दल ने किया शस्त्र पूजन, शक्ति के सदुपयोग का लिया संकल्प
- शस्त्र पूजन मूल्यों की रक्षा का प्रतीक: दिवाकर
मीरजापुर, 20 अक्टूबर (हि.स.)। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को मीरजापुर जिले में विश्व हिंदू परिषद कार्यालय, इमलहा नाथ महादेव मंदिर, दक्षिण फाटक लालडिग्गी में बजरंग दल की ओर से शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व बजरंग दल के विभाग संयोजक प्रवीण ने किया। इस दौरान वक्ताओं ने शस्त्र पूजन की परंपरा, उसके महत्व और समाज में इसकी प्रासंगिकता पर विचार रखे।
विश्व हिंदू परिषद पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र सत्संग प्रमुख दिवाकर ने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन बुराई पर अच्छाई की विजय, आत्मरक्षा और धर्म-न्याय की रक्षा का प्रतीक है। शस्त्रों को केवल हिंसा का साधन नहीं, बल्कि अधर्म, अन्याय और बुराई के विरुद्ध सुरक्षा के माध्यम के रूप में देखा जाता है। यह परंपरा व्यक्ति के भीतर आत्मबल, पराक्रम और आत्मविश्वास बढ़ाने का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि पूजन का भाव केवल तलवार और अन्य शस्त्रों तक सीमित नहीं है। किसान के कृषि उपकरण, वाहन चालक के वाहन, कारखानों की मशीनें और कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर व कलम भी आजीविका के साधन हैं। इनका सम्मान करना भी इसी परंपरा का हिस्सा है। शस्त्र पूजन के अवसर पर यह संकल्प लिया जाता है कि शक्ति का उपयोग किसी को भयभीत करने के लिए नहीं, बल्कि समाज, परिवार और देश की सुरक्षा तथा धर्म की स्थापना के लिए किया जाए।
दिवाकर ने भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और पांडवों से जुड़ी परंपराओं का उल्लेख करते हुए शस्त्र पूजन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बताया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा