भगवान की कथा सुनने से आत्मा को मिलती है मुक्ति : विष्णुधर द्विवेदी
मीरजापुर, 10 मई (हि.स.)। जिगना क्षेत्र के परमानपुर गांव में गंगा तट पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को कथा व्यास पं. विष्णुधर द्विवेदी ने प्रद्युम्न जन्म और सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा व्यास ने बताया कि द्वारका के सूतिका गृह से प्रद्युम्न को उठाकर समुद्र में फेंक दिया गया था। नवजात शिशु एक मछली के पेट में पहुंचकर संभ्रासुर के महल तक पहुंच गया, जहां रति ने उसे बाहर निकालकर मायावी विद्या से पालन-पोषण किया। बाद में प्रद्युम्न ने संभ्रासुर का वध कर रति के साथ द्वारका में प्रवेश किया।
सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता की मिसाल भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा ने प्रस्तुत की। भगवान ने सुदामा को अनंत ऐश्वर्य देकर मित्रता का आदर्श स्थापित किया।
उन्होंने आगे कहा कि यदुवंश को श्राप लगने के बाद द्वारकापुरी समुद्र में समाहित हो गई और भगवान श्रीकृष्ण परमधाम को पधार गए। परीक्षित प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आत्मा अमर है, नष्ट केवल पंचभौतिक शरीर होता है। भगवान की अमृतमयी कथा सुनने वाला व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है। अंत में भगवान नाम के संकीर्तन के साथ भागवत कथा का विश्राम हुआ। कथा व्यास के भजनों और संगीत की स्वर लहरियों पर श्रद्धालु झूमते रहे।
इस अवसर पर रामनिवास पांडेय, जय देवी, सुनील, सुधीर, सुजीत, दिव्यांश, निधि, कमलेश, पप्पू, लाल साहब, महेंद्र देव, आशीष, राधे मिश्रा, पीयूष, श्रीकांत, दिलीप और अभिराम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा