गजेंद्र मोक्ष कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, वत्सल महाराज ने दिया आत्मज्ञान का संदेश
मीरजापुर, 18 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के जिगना क्षेत्र के गोसीपुर गांव स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गुरुवार को वृंदावन से पधारे कथावाचक वत्सल महाराज ने गजेंद्र मोक्ष की मार्मिक कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्ति और आत्मज्ञान का संदेश दिया।
कथा के दौरान वत्सल महाराज ने कहा कि जीवन में हर व्यक्ति का महत्व होता है। अच्छे लोग साथ देकर प्रेरणा देते हैं, जबकि बुरे लोग हमें सबक सिखाते हैं। इसलिए किसी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने गजेंद्र मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जब गजेंद्र का पैर ग्राह (मगरमच्छ) ने पकड़ लिया तो वह लंबे समय तक संघर्ष करता रहा। समय बीतने के साथ पत्नी, बच्चे और साथी भी उसका साथ छोड़कर चले गए। तब उसे एहसास हुआ कि सांसारिक संबंध संकट की घड़ी में हमेशा साथ नहीं रहते।
कथावाचक ने बताया कि गजेंद्र को अपने पूर्व जन्म की स्मृति हुई। वह पूर्व जन्म में इंद्रद्युम्न नामक राजा था। एक बार वह भगवान की सेवा में इतना तल्लीन था कि आश्रम में आए एक संत की उपेक्षा कर बैठा। इतना ही नहीं, उसके मन में संत के प्रति अनादर का भाव भी आ गया। इसी अपराध के कारण उसे गज योनि प्राप्त हुई।
संकट की घड़ी में गजेंद्र ने किसी देवता का नहीं, बल्कि परमात्मा का स्मरण किया। उसकी करुण पुकार सुनकर भगवान नारायण स्वयं गरुड़ पर सवार होकर पहुंचे और सुदर्शन चक्र से ग्राह को मोक्ष प्रदान कर गजेंद्र को मुक्त कराया। वत्सल महाराज ने कहा कि गजेंद्र मोक्ष की कथा हमें अहंकार त्यागने, संतों का सम्मान करने और विपत्ति में ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देती है। जो श्रद्धा भाव से इस कथा का श्रवण और स्मरण करते हैं, वे जीवन के अनेक संकटों से मुक्त रहते हैं। कथा के दौरान यजमान राम आसरे पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक रस का आनंद लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा