नवरात्र में कंकाल काली के दरबार में उमड़ रहे भक्त, चंड-मुंड संहार से जुड़ी है पौराणिक मान्यता

 


मीरजापुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। नवरात्र के पर्व पर अकोढ़ी गांव के मध्य स्थित दिव्य मंदिर में विराजमान कंकाल काली के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भोर में आरती से पहले मां की फूलों से भव्य झांकी सजाई गई। भक्तों ने मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर के पुजारी दिनेश कुमार के अनुसार, पौराणिक मान्यता है कि त्रेतायुग में विंध्य क्षेत्र में पंपापुर नगर था। चंड-मुंड नामक दैत्यों के अत्याचार से त्रस्त देवताओं की पुकार पर शक्ति स्वरूपा मां काली प्रकट हुई थीं। रणभूमि में चंड-मुंड का संहार करते समय अत्यधिक क्रोध के कारण मां की मुख मुद्रा कंकाल जैसी हो गई। इसी स्वरूप में मां यहां कंकाल काली के नाम से पूजी जाती हैं। मां के भक्त तीर्थराज सिंह ने बताया कि नवरात्र के दौरान आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा