गंगा नदी में सीवर गिरने से भड़के मीरजापुर के 22 गांवाें के ग्रामीण, जिलाधिकारी काे दिया ज्ञापन

 


- महेवा घाट पर प्रदूषण का आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार

मीरजापुर, 15 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर शहर का सीवर गंगा में गिरने के विरोध में गंगा किनारे बसे 22 गांवों के लोगों ने बुधवार काे जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि महेवा घाट पर लगातार सीवर का गंदा पानी गिरने से गंगा का जल प्रदूषित हो रहा है। दुर्गंध फैल रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

अधिवक्ता अखिलेश दुबे के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि महेवा घाट कभी स्नान, पूजा-पाठ और सुबह-शाम भ्रमण का प्रमुख केंद्र हुआ करता था, लेकिन अब शहर का गंदा सीवर सीधे गंगा में गिरने से घाट की स्थिति बदतर हो गई है। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का घाट पर आना-जाना भी कम हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का दूषित होता जल आसपास के गांवों के लोगों और पशुओं के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। गंगा किनारे बसे लगभग 22 गांवों की आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नदी के जल पर निर्भर है। ऐसे में लगातार बढ़ता प्रदूषण भविष्य में गंभीर जलजनित बीमारियों का कारण बन सकता है।

ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि गंगा में गिर रहे सीवर के पानी को तत्काल रोका जाए, जल गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराई जाए तथा स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो गंगा संरक्षण के लिए आंदोलन तेज किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा