सावन सोमवार और नागपंचमी पर त्रिलोचन महादेव मंदिर, और गौरी शंकर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब

 






जौनपुर,17 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के पावन अवसर पर प्राचीन त्रिलोचन महादेव मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर से पहले ही बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंजता रहा।

मुख्य पुजारी रविशंकर गिरी उर्फ सोनू ने बताया कि रात्रि आरती के बाद करीब 2:30 बजे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए। मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह 10 बजे तक करीब 30 हजार श्रद्धालु बाबा त्रिलोचन महादेव के दर्शन कर चुके थे। भक्त कतारबद्ध होकर जलाभिषेक और पूजन-अर्चन करते रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और मालाएं अर्पित कर विधिवत पूजा की। नागपंचमी के अवसर पर नाग देवता के प्रतीक स्वरूप विशेष पूजन भी किया गया। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के चलते मंदिर के बाहर करीब 200 मीटर लंबी कतार लग गई। इसमें महिला, पुरुष और बुजुर्ग श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर, मेला क्षेत्र और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र विक्रम सिंह पुलिस बल के साथ मेला क्षेत्र का लगातार भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।

इसी तरह सुजानगंज के गौरीशंकर धाम में भी सावन के तीसरे सोमवार पर जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां करीब 500 मीटर लंबी दो कतारें लगी रहीं। 14वीं शताब्दी (भर शासनकाल) से जुड़ा एक अति प्राचीन और ऐतिहासिक शक्तिपीठ है, जहां अर्धनारीश्वर रूप में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है और इसे क्षेत्र में असीम आस्था व चमत्कारिक केंद्र माना जाता है। यहाँ स्थापित शिवलिंग मनुष्य द्वारा स्थापित नहीं बल्कि प्रकट (स्वयंभू) और शाश्वत है। यह शिवलिंग भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त अर्धनारीश्वर रूप का दिव्य दर्शन कराता है। ऐसी मान्यता है कि 14वीं सदी में एक चरवाहे ने देखा कि एक विशेष टीले पर गाय के थनों से दूध अपने आप उस काले पत्थर पर गिर रहा है, जिसके बाद खुदाई न करवाकर वहाँ मंदिर की स्थापना की गई।

स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, आरती के समय यहाँ बजने वाले घंटे की ध्वनि जितनी दूर तक (लगभग 5 किमी) जाती है, उतनी परिधि में कोई भीषण प्राकृतिक आपदा नहीं आती। श्रावण मास के सोमवारों और महाशिवरात्रि पर यहाँ जौनपुर के अलावा प्रतापगढ़ व प्रयागराज से भारी संख्या में कांवरिया आकर जलाभिषेक करते हैं। प्रत्येक शनिवार और सोमवार को यहाँ भक्तों की भारी भीड़ जुटती है और मेल का आयोजन होता है। मंदिर परिसर के पास पुलिस प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से दर्शन कराने की व्यवस्था की। राजस्व कर्मियों के साथ फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर मौजूद रही।

हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव