चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहा विपक्ष : डॉ. संजय निषाद
लखनऊ, 27 सितंबर (हि.स.)। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल(निषाद पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मत्स्य विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अपनी राजनीतिक असफलता का ठीकरा चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर फोड़कर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
संजय निषाद इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में रविवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर विपक्षी दल इसे जनता का समर्थन बताते हैं, जबकि पराजय के बाद ईवीएम और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस लगातार ऐसे मुद्दे उठा रही हैं, जिनके जरिए लोगों के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
निषाद पार्टी के अध्यक्ष ने कहा कि जो दल लगातार संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करते हैं, वही अब संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के अतीत का उल्लेख करते हुए आपातकाल का हवाला दिया और कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उसके रुख को देश देख चुका है। उन्होंने सपा और कांग्रेस की नजदीकी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी आज उसी कांग्रेस के साथ राजनीतिक गठजोड़ की कोशिश कर रही है, जिस पर वह स्वयं कई बार सवाल उठाती रही है।
ईवीएम पर सवाल को लेकर अखिलेश को घेरा
संजय निषाद ने ईवीएम को लेकर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य दलों ने अतीत में इसी चुनाव प्रणाली के जरिए सत्ता हासिल की है। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि ईवीएम से जुड़ी आपत्तियां उठाने से पहले उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि इसी व्यवस्था के तहत वह सांसद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
एसआईआर को लेकर विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसएसआर) को लेकर भी निषाद ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है और देश में अलग-अलग समय पर इसका इस्तेमाल किया जा चुका है। उनके अनुसार, वर्ष 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी इस तरह का पुनरीक्षण हुआ था।
उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान जिन पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें नाम जुड़वाने का अवसर दिया गया है। निषाद के मुताबिक, इसके लिए निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की व्यवस्था पहले से मौजूद है और पात्र मतदाताओं को इसका लाभ लेना चाहिए।
संजय निषाद ने कहा कि जनता ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर भरोसा जताया है और विपक्ष अपनी राजनीतिक स्थिति को स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग को निशाना बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने की कोशिश में सपा और कांग्रेस जनता के फैसले पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को चुनावी नतीजों पर आत्ममंथन करना चाहिए, न कि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ भ्रम पैदा करना चाहिए। निषाद ने दावा किया कि जनता विपक्ष की राजनीति को समझ चुकी है और उसके दावों को स्वीकार नहीं कर रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा