रोहिणी की बारिश और मृगशिरा की तपन से खिल उठे किसानों के चेहरे, बंपर धान उत्पादन की जगी उम्मीद
मीरजापुर, 01 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जनपद में बीते दिनों हुई झमाझम बारिश और उसके बाद निकली तेज धूप ने जिले के किसानों के चेहरे पर फिर से रौनक लौटा दी है। गांवों की चौपालों से लेकर खेत-खलिहानों तक इन दिनों लोककवि घाघ की प्रसिद्ध कहावत रोहिणी बरसे, मृग तपे, कुछ-कुछ आद्रा जाए, घाघ कहें सुन घाघनी, स्वान भात नहीं खाए, चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
कृषि विशेषज्ञों और अनुभवी किसानों का मानना है कि यदि रोहिणी नक्षत्र में अच्छी वर्षा हो और मृगशिरा नक्षत्र में पर्याप्त धूप व गर्मी मिले, तो धान समेत खरीफ फसलों की पैदावार शानदार होती है। मौजूदा मौसम को देखकर किसानों को भी इसी शुभ संकेत की उम्मीद दिखाई दे रही है।
हाल की बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंच गई है, जिससे कृषि कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है। किसान जुताई, पाटा लगाने, मेड़बंदी करने और खेतों में उगे खरपतवारों को नष्ट करने में जुट गए हैं। उनका कहना है कि मृगशिरा की तपिश मिट्टी को और अधिक उपजाऊ बनाकर खरीफ फसलों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेगी।
उधर, मानसून की आहट के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी तैयारियां तेज हो गई हैं। लोग अपने कच्चे मकानों, खपड़ैल घरों, मड़हों और झोपड़ियों की मरम्मत कराने में व्यस्त हैं, ताकि बरसात के मौसम में किसी तरह की परेशानी न हो।
अगैती खेती करने वाले किसान 1 से 5 जून के बीच धान की नर्सरी डालने की तैयारी में जुटे हैं। बीज उपचार, खेतों की जुताई और मेड़बंदी जैसे जरूरी कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। किसानों को भरोसा है कि यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा तो इस वर्ष धान की फसल रिकॉर्ड उत्पादन दे सकती है।
ग्रामीण बुजुर्ग बताते हैं कि घाघ की कहावतें केवल लोककथाएं नहीं, बल्कि पीढ़ियों के कृषि अनुभव का सार हैं। मौसम के वर्तमान संकेतों को देखकर उन्हें भी लग रहा है कि इस बार घाघ की भविष्यवाणी फिर सच साबित हो सकती है। यही कारण है कि खेतों में मेहनत के साथ-साथ किसानों के मन में बेहतर पैदावार और समृद्धि की नई उम्मीद भी अंकुरित हो चुकी है।
क्षेत्र के अनुभवी किसान लालता प्रसाद का कहना है कि रोहिणी नक्षत्र में हुई बारिश धान की खेती के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। खेतों में पर्याप्त नमी होने से जुताई और नर्सरी की तैयारी आसान हो गई है। यदि आगे भी मौसम अनुकूल रहा तो इस बार धान की अच्छी पैदावार होने की पूरी संभावना है।
वहीं किसान आत्माराम पांडेय ने बताया कि घाघ की कहावतें वर्षों के अनुभव और प्रकृति के गहरे अध्ययन पर आधारित हैं। वर्तमान मौसम को देखकर लगता है कि इस वर्ष खरीफ फसलों के लिए परिस्थितियां काफी अनुकूल बन रही हैं। किसानों में उत्साह का माहौल है और वे पूरे मनोयोग से खेती की तैयारी में जुटे हैं।
किसान गुलाब सिंह का कहना है कि समय पर हुई वर्षा से खेतों की नमी बढ़ी है और खरपतवार नियंत्रण में भी मदद मिली है। अब तेज धूप मिट्टी को खेती के लिए और अधिक तैयार कर रही है। इससे धान के साथ-साथ अन्य खरीफ फसलों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
अनुभवी कृषक कृष्ण शरण सिंह ने कहा कि गांव के बुजुर्ग हमेशा से रोहिणी और मृगशिरा के मौसम को खेती के लिए महत्वपूर्ण मानते आए हैं। इस बार मौसम का रुख पारंपरिक मान्यताओं के अनुरूप दिखाई दे रहा है, जिससे किसानों को बंपर उत्पादन की आशा जगी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा