यूपी रेरा ने पात्र परियोजनाओं के पंजीकरण और पूरा होने की अवधि बढ़ाई
लखनऊ, 25 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश भू-संपदा नियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने पात्र पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं को चार महीने की अतिरिक्त मोहलत देने का फैसला किया है। इससे संबंधित परियोजनाओं के पंजीकरण की वैधता और परियोजना पूरी करने की निर्धारित अवधि चार महीने बढ़ जाएगी।
28 फरवरी से 31 अक्टूबर 2026 तक की परियोजनाएं पात्र
यूपी रेरा के अनुसार, जिन पंजीकृत परियोजनाओं की मूल, संशोधित या पहले से बढ़ाई गई पूरी करने की तारीख 28 फरवरी 2026 से 31 अक्टूबर 2026 के बीच है, उन्हें चार महीने का विस्तार दिया जाएगा। यह विस्तार परियोजना के मौजूदा पंजीकरण की अंतिम वैधता तिथि से लागू होगा।
यह फैसला केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की 31 जुलाई 2026 की सलाह के आधार पर लिया गया है। मंत्रालय ने असाधारण परिस्थितियों से प्रभावित परियोजनाओं को राहत देने के लिए सामूहिक आदेश के जरिए चार महीने की अवधि बढ़ाने का सुझाव दिया था।
जरूरी शर्तें पूरी करना अनिवार्य
चार महीने की अतिरिक्त अवधि का लाभ लेने के लिए परियोजना प्रवर्तकों को कुछ जरूरी नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें 28 फरवरी 2026 को स्वीकृत नक्शे, लेआउट या भवन योजना की वैधता होना, पंजीकरण की अंतिम वैधता तिथि तक सभी लंबित त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (क्यूआरपी) जमा करना और वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट (REG-5) दाखिल करना शामिल है।
इन सभी शर्तों को पूरा करने वाली पात्र परियोजनाओं का पंजीकरण स्वतः चार महीने के लिए बढ़ा दिया जाएगा। यदि किसी प्रवर्तक ने इनमें से कोई अनुपालन पूरा नहीं किया है तो वह उसे जल्द पूरा कर प्राधिकरण से लिखित अनुरोध कर सकता है। सत्यापन के बाद यूपी रेरा का तकनीकी विभाग पंजीकरण की अवधि बढ़ाने की कार्रवाई करेगा।
पूर्णता या अधिभोग प्रमाणपत्र वाली परियोजनाओं को लाभ नहीं
जिन परियोजनाओं को पहले ही पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificate) या अधिभोग प्रमाणपत्र (Occupancy Certificate) मिल चुका है, उन्हें इस विस्तार का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त अवधि की आवश्यकता नहीं है।
खरीदार और प्रवर्तक के बीच समझौते पर असर नहीं
यूपी रेरा ने स्पष्ट किया है कि चार महीने का यह विस्तार केवल परियोजना के रेरा पंजीकरण और प्राधिकरण के रिकॉर्ड में दर्ज परियोजना की निर्धारित पूर्णता अवधि पर लागू होगा। प्रवर्तक और खरीदार के बीच पहले से हुए बिक्री समझौते के अधिकार और दायित्व पहले की तरह ही बने रहेंगे।
देरी पर ब्याज के नियम भी यथावत
कब्जा देने में देरी होने पर प्रवर्तक द्वारा खरीदार को दिए जाने वाले ब्याज और खरीदार की ओर से भुगतान में देरी होने पर प्रवर्तक को देय ब्याज के नियम भी इस विस्तार से प्रभावित नहीं होंगे। इस फैसले का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों से प्रभावित पात्र परियोजनाओं को समय पर राहत देना है। साथ ही, खरीदारों और प्रवर्तकों के बीच पहले से तय संविदात्मक अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन