नारद मोह और विश्व मोहिनी स्वयंवर के मंचन से जीवंत हुई रामलीला
मीरजापुर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। जिगना क्षेत्र के पाली गांव में गुरुवार की रात रामलीला समिति की ओर से रामलीला मंचन का शुभारंभ हुआ। पहले दिन नारद मोह और विश्व मोहिनी स्वयंवर की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने नारद के मोह, स्वयंवर में उनके अपमान और भगवान विष्णु को दिए गए श्राप के प्रसंग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
मंचन के अनुसार, नारद ऋषि को भगवान विष्णु ने देव नगरी में माया-मोह से दूर रहने की सलाह दी, लेकिन नारद को अपने वैराग्य पर पूरा विश्वास था। देव नगरी से गुजरते समय वह विश्व मोहिनी के रूप पर मोहित हो गए। विश्व मोहिनी ने बताया कि उसका स्वयंवर होने वाला है और वह ऐसे तेजस्वी रूपवान को वरमाला पहनाएगी, जिसका मुख भगवान विष्णु जैसा हो।
इसके बाद नारद भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उनके समान मुख पाने की इच्छा जताई। भगवान ने उन्हें तथास्तु कह दिया। अपने रूप पर प्रसन्न नारद स्वयंवर में पहुंचे, लेकिन वहां अपने वानर जैसे मुख के कारण उपहास का पात्र बन गए। विश्व मोहिनी ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया और स्वयंवर में प्रकट हुए भगवान विष्णु को वरमाला पहनाकर उनका वरण कर लिया।
स्वयंवर में अपमानित नारद ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि उन्हें भी पत्नी के वियोग का दुख सहना पड़ेगा और उस समय वानर ही उनकी सहायता करेंगे। यह प्रसंग रामायण में भगवान राम के वनवास और माता सीता की खोज में वानर सेना की भूमिका की ओर संकेत करता है। नारद की भूमिका में विमलेश, भगवान विष्णु के रूप में एस. तिवारी, भगवान शंकर के रूप में अनुज तिवारी और ब्रह्मा की भूमिका में सुशील तिवारी ने अभिनय किया। कलाकारों के मंचन ने दर्शकों को कथा से जोड़े रखा। श्रीकृष्ण तिवारी के निर्देशन में पाली गांव में पिछले छह दशकों से रामलीला का मंचन किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा