रास जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक : पं. विष्णुधर द्विवेदी
मीरजापुर, 09 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मिरजापुर जिले के जिगना क्षेत्र के परमानपुर गांव स्थित गंगा तट पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन शनिवार को कथा व्यास पं. विष्णुधर द्विवेदी ने भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, कंस वध और द्वारका निर्माण प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा व्यास ने कहा कि रास जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण ने जीव और परमात्मा के बीच पड़े आवरण रूपी पर्दे को हटाकर रास किया। उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण और बलराम मथुरा पहुंचे तो भगवान परशुराम द्वारा प्रदत्त धनुष को तोड़ दिया, जिससे कंस की चिंता बढ़ गई।
उन्होंने बताया कि 11 वर्ष 56 दिन की आयु में भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का उद्धार किया और अपने माता-पिता को कारागार से मुक्त कराया। साथ ही नाना उग्रसेन को पुनः राज्य सौंपा। इसके बाद सांदीपनि आश्रम में अल्प समय में संपूर्ण विद्याओं का अध्ययन कर सुदामा से मित्रता स्थापित की।
पं. द्विवेदी ने कहा कि केवल ज्ञान का कोई महत्व नहीं होता, ज्ञान के साथ प्रेम भी आवश्यक है। प्रेम और भक्ति से ही भगवान की प्राप्ति संभव है। उन्होंने जरासंध के मथुरा पर 17 बार आक्रमण और कालयवन के उद्धार का प्रसंग भी सुनाया।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा समुद्र के भीतर द्वारकापुरी बसाने, बलराम-रेवती विवाह और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
इस दौरान रामनिवास पांडेय, जय देवी, सुधीर, सुनील, सुजीत पांडेय, निधि पांडेय, दिव्यांश, पप्पू, कमलेश पांडेय, सुशांत पांडेय, लाल साहब, महेंद्र देव पांडेय, श्रीकांत उपाध्याय, दिलीप शुक्ला, आशीष मिश्रा, राधे मिश्रा और पीयूष गोयल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा