पावर ऑफ माइंड पुस्तक से मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच होती है विकसित : कुलाधिपति

 


वाराणसी, 12 जनवरी(हि. स.)।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में विवेकानंद जयंती समारोह के उपलक्ष्य में “अच्छी शिक्षा, अच्छे शिक्षक: आधुनिक मार्गदर्शक के रूप में स्वामी विवेकानंद की दृष्टि” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई, जिसे डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके उपरांत दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय एवं स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. जय प्रकाश लाल, कुलाधिपति, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय रहे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. पवन कुमार शर्मा, आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने की। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) आईयूसीटीई, वाराणसी ने स्वागत उद्बोधन किया।

झारखंड के केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. जय प्रकाश लाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के अनुसार युवाओं में तीन प्रमुख गुण: आत्मबल एवं आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और शिक्षा, तथा मानवता की निःस्वार्थ सेवा, अवश्य होने चाहिए। उन्होंने ‘पावर ऑफ माइंड’ पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवन में अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के आचार्य प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद सही मायनों में एक महान दृष्टा थे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मूलतः स्वामी विवेकानंद के शिक्षा संबंधी विचारों का ही प्रसार है। उनके अनुसार सच्चा शिक्षक वह होता है जो अहंकार से मुक्त हो, जिसका अपना कुछ न हो और जो विद्यार्थी के मन को पढ़ सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण है। अध्यक्षीय उद्बोधन में आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने सभी का अभिनंदन करते हुए कहा कि जब शिक्षक अच्छा होगा तभी शिक्षा अच्छी होगी, और अच्छा शिक्षक बनने के लिए शिक्षा का सुदृढ़ होना आवश्यक है, ये दोनों बातें एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

इस अवसर पर “प्रमा जर्नल के प्रथम संस्करण” का उद्घाटन तथा ‘शैक्षिक मनोविज्ञान’ नामक पुस्तक का अनावरण किया गया। विद्वज्जनों ने प्रमा जर्नल के प्रथम संस्करण के प्रकाशन पर संपादक मंडल के सभी सदस्यों तथा सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष को हार्दिक बधाई दी।

हिन्दुस्थान समाचार / शरद