गौमाता को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर बने कठोर कानून : दिनेश उपाध्याय

 




गोवंश के लिए स्वतंत्र मंत्रालय, गोचर भूमि को मुक्त कर बेसहारा गोवंश के लिए शरणस्थली बनाने की मांग

प्रयागराज, 30 अगस्त (हि.स.)। गौमाता को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए। गौहत्या रोकने के लिए कठोर कानून बनाया जाए और गोवंश के लिए अलग से मंत्रालय गठित किया जाए। यह बातें रविवार को प्रयागराज के नैनी स्थित सच्चा बाबा आश्रम, अरैल में आयोजित विहिप की बैठक में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय गोरक्षा प्रमुख दिनेश उपाध्याय ने कहीं।

उन्होंने कहा कि गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर बेसहारा गोवंश के लिए शरणस्थली बनाया जाए। पंचगव्य और गोआधारित जैविक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण देकर गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए, तभी गौमाता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

दिनेश उपाध्याय ने कहा कि गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर संस्थाओं के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए पंचगव्य उत्पादों और गोआधारित जैविक कृषि को बढ़ावा देने की जरूरत है। किसानों को प्रशिक्षण देकर गोआधारित कृषि से जोड़ा जाए, जिससे गोवंश का संरक्षण होने के साथ ही ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हों।

विश्व हिंदू परिषद गोरक्षा के प्रांत मंत्री लालमणि तिवारी ने कहा कि गाय बचेगी, तभी देश बचेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गौसेवा को नारायण सेवा मानकर गोवंश की सेवा और संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।

बैठक सच्चा बाबा आश्रम, अरैल में आयोजित की गई। इसमें काशी प्रांत के 22 जिलों से करीब 105 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

बैठक में क्षेत्र गौशाला संपर्क प्रमुख जितेंद्र, विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत के उपाध्यक्ष एवं गोरक्षा के पालक अधिकारी सुरेश अग्रवाल, प्रांत अध्यक्ष भोलानाथ सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी विचार रखे।

इस अवसर पर क्षेत्र गोरक्षा प्रमुख प्रेमशंकर, महेंद्र शुक्ला, लवलेश बजरंगी, अशोक, विजय पांडेय सहित काशी प्रांत के 22 जिलों से आए करीब 105 कार्यकर्ता मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल