लोक कल्याण और लोक आराधन को समर्पित था श्रीराम का जीवन : प्रो. निरूपमा त्रिपाठी
प्रयागराज, 25 अगस्त (हि.स.)। श्रीराम का जीवन लोक कल्याण और लोक आराधन को समर्पित था। इसी कारण करुण रस से प्रधान होने के बावजूद उत्तररामचरित’ सुखांत नाटक है। यह बातें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की प्रो. निरूपमा त्रिपाठी ने मंगलवार को आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के संस्कृत विभाग में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में कहीं।
प्रो. निरूपमा त्रिपाठी ने कहा कि ‘उत्तररामचरित’ में श्रीराम के चरित्र का मूल आधार लोक आराधन है। श्रीराम ने लोकहित और मर्यादा को सर्वोच्च महत्व दिया। उनके चरित्र में त्याग, कर्तव्य और लोक कल्याण की भावना दिखाई देती है। यही कारण है कि नाटक में करुण प्रसंगों की प्रधानता होने के बावजूद इसका अंत सुखद होता है।
कार्यक्रम में शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को श्रीराम के आदर्शों के अनुरूप आचरण करना चाहिए, न कि रावण के समान। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना तभी संभव है, जब लोग अपने जीवन में मर्यादा, संयम और सदाचार को अपनाएं।
कॉलेज की प्राचार्या ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की। कॉलेज की मुख्य अनुशासक डॉ. रंजना त्रिपाठी ने कहा कि आज के समय में परिवार और सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए रामकथा से बेहतर उदाहरण दूसरा नहीं है। श्रीराम का जीवन परिवार, समाज और कर्तव्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती सरोज ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सोनमती पटेल ने किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. निशा खन्ना और डॉ. पूजा जायसवाल ने किया।
इस अवसर पर उपप्राचार्या प्रो. इभा सिरोठिया, डीन अंजू, डॉ. श्यामकांत, डॉ. अमित, डॉ. सव्यसाची, डॉ. मुदिता, डॉ. ज्योति, डॉ. शशि, डॉ. सोनम, डॉ. रागिनी, डॉ. श्रुति, डॉ. दामिनी सहित महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं
उपस्थित रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल