कागजों में नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए वृक्षारोपण : रेवती रमण सिंह
महाकुंभ में विदेशी पेड़ों पर करोड़ों खर्च हुए, देशी पेड़ लगाए होते तो आज शहर को मिलती छाया और शुद्ध हवा : रेवती रमण सिंह
प्रयागराज, 05 जून (हि.स.)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वरिष्ठ समाजवादी नेता एवं पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने प्रयागराज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रयागराज में पारंपरिक एवं पर्यावरण अनुकूल वृक्षों के बड़े पैमाने पर रोपण की मांग की है। उनका कहना है कि महाकुंभ की तैयारियों के दौरान करोड़ों रुपये खर्च कर विदेशी प्रजाति के पेड़ लगाए गए, जबकि उनकी जगह देशी और पारंपरिक वृक्ष लगाए गए होते तो आज भीषण गर्मी में शहर को छाया, शुद्ध हवा और बेहतर पर्यावरण मिलता।
पूर्व सांसद ने कहा कि प्रयागराज की आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि पेड़ों की संख्या घटती जा रही है। उन्होंने आगामी महाकुंभ एवं जनपद की प्रमुख सड़कों के किनारे ताड़, खजूर और अन्य विदेशी प्रजातियों के स्थान पर आम, महुआ, पीपल, बरगद, पाकर, गूलर और इमली जैसे पारंपरिक वृक्ष लगाने की आवश्यकता बताई।
सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने बताया कि रेवती रमण सिंह ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि प्रयागराज में ‘हरित कुंभ’ की बात तो की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सड़कों के किनारे मुख्य रूप से एक ही प्रकार के पेड़ लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले महात्मा गांधी मार्ग को ‘पिपरिया रोड’ कहा जाता था क्योंकि सड़क के दोनों ओर पीपल के घने वृक्ष थे। इसी प्रकार रामबाग स्टेशन रोड पर इमली के पेड़ और प्रयागराज-मिर्जापुर मार्ग पर आम, महुआ एवं पीपल के विशाल वृक्ष लोगों को छाया और पर्यावरणीय संतुलन प्रदान करते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान इन पारंपरिक वृक्षों को काट दिया गया और उनकी जगह गुलमोहर, ताड़ और खजूर जैसे पेड़ लगा दिए गए, जो न तो पर्याप्त छाया देते हैं और न ही स्थानीय पक्षियों एवं जीव-जंतुओं के लिए उपयोगी साबित होते हैं।
पूर्व सांसद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पर्यावरण संरक्षण के वास्तविक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज को सही मायनों में ‘हरित जनपद’ बनाने के लिए देशी और दीर्घायु वृक्षों का व्यापक स्तर पर रोपण कराया जाए।
वहीं प्रयागराज सांसद उज्जवल रमण सिंह ने विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण अभियानों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर वर्ष करोड़ों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब लगाए गए पौधे धरातल पर जीवित रहें, विकसित हों और आने वाली पीढ़ियों को उनका लाभ मिले।
उज्जवल रमण सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल आंकड़ों और अभियानों से नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और उनकी नियमित देखभाल से संभव है। उन्होंने वृक्षारोपण अभियानों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने
की मांग भी की।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल