श्रावणी उपाकर्म और रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा

 


प्रयागराज, 25 अगस्त (हि.स.)। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि दो दिन रहने के कारण रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म की तिथि को लेकर विद्वानों ने शास्त्रीय गणना के आधार पर निर्णय लिया है। प्रयागराज के विद्वानों के अनुसार 28 अगस्त, शुक्रवार को श्रावणी उपाकर्म और रक्षाबंधन मनाना उचित होगा। 27 अगस्त को भद्रा होने के कारण उस दिन रक्षाबंधन मनाना उचित नहीं माना गया है।

विद्वानों के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 8:32 बजे शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:19 बजे तक रहेगी। स्नान, दान और व्रत की पूर्णिमा के लिए उदय तिथि को मान्यता दी जाती है। श्रावणी उपाकर्म में स्नान प्रमुख कर्म है, इसलिए 28 अगस्त को प्रातःकाल श्रावणी उपाकर्म करना शास्त्रसम्मत माना गया है।

इसी प्रकार 27 अगस्त को रात 8:55 बजे तक भद्रा रहेगी। भद्रा काल में रक्षाबंधन मनाना उचित नहीं माना जाता। 28 अगस्त को पूर्णिमा की उदय तिथि होने के कारण पूरे दिन रक्षाबंधन के लिए शुभ माना गया है। विद्वानों ने शास्त्रीय सिद्धांत ‘या तिथिरुदया ज्ञेया सा तिथिः सकला स्मृता’ के आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन के लिए प्रशस्त बताया है।

विद्वत संगोष्ठी में हुआ निर्णय

रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म की तिथि को लेकर श्री वेदांग संस्थान के कार्यालय परिसर में मंगलवार काे विद्वत संगोष्ठी आयोजित की गई। इसका आयोजन श्री निर्वाण संस्कृत स्नातकोत्तर विद्यालय, सौदामिनी संस्कृत विद्यालय, हनुमत् संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कामाख्या ज्योतिष संस्थान, अखिल भारतीय प्रयाग पंडित सभा और श्री वेदांग संस्थान, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

संगोष्ठी में प्रयागराज के अनेक विद्वान उपस्थित रहे। इनमें डॉ. बाबूलाल मिश्र, डॉ. शम्भुनाथ त्रिपाठी अंशुल, डॉ. राममिलन मिश्र, डॉ. पवन शुक्ल, अवधनारायण द्विवेदी, पं. श्याम शंकर शुक्ल, पं. अरुण कुमार द्विवेदी (सोनू), शुभांशु मिश्र, देवेन्द्र तिवारी, पं. द्वारिका प्रसाद पाण्डेय, ब्रह्मानंद मिश्र, भानू त्रिपाठी, दीपू, चूड़ामणि और राजेन्द्र प्रसाद तिवारी उर्फ दुकान जी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

विद्वानों ने शास्त्रीय सिद्धांतों और तिथि गणना पर विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से 28 अगस्त को श्रावणी उपाकर्म एवं रक्षाबंधन मनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उदय तिथि और भद्रा की स्थिति को देखते हुए यही तिथि शास्त्रसम्मत और उपयुक्त है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल