षड्यंत्रों और आघातों से सावधान रहें हिंदू, सनातन मानबिंदुओं की रक्षा का लें संकल्प : स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

 


प्रतिदिन सवा घंटे भजन करें, समयाभाव में कम से कम 24 मिनट आराधना के लिए निकालें :पुरी शंकराचार्य

प्रयागराज, 01 अक्टूबर (हि.स.)। हिंदू समाज से अपने ऊपर होने वाले आघातों और षड्यंत्रों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। यह बातें गुरुवार को झूंसी स्थित पुरी पीठ के केंद्र शिवगंगा आश्रम में अपने दस दिवसीय प्रवास के दौरान शिष्यों और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गोवर्धन मठ, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहीं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक हिंदू को राष्ट्रहित की भावना से जागरूक होकर सनातन मानबिंदुओं की रक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए। प्रतिदिन सवा घंटे भजन करने का प्रयास करें। यदि समय का अभाव हो तो 24 घंटे में कम से कम 24 मिनट आराधना और पूजन के लिए अवश्य निकालें।

जिज्ञासुओं द्वारा आध्यात्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू समाज को तटस्थ रहकर परिस्थितियों को नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार सनातन सिद्धांतों और मानबिंदुओं की रक्षा के लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने भारत में शासन व्यवस्था को सनातन सिद्धांतों के अनुरूप स्थापित करने की आवश्यकता पर भी अपने विचार रखे।

युवाओं से व्यसन से दूर रहने की अपील

पुरी शंकराचार्य ने कहा कि भारत की मेधा शक्ति का विश्व लोहा मानता है। भारतीय युवाओं में अपार ऊर्जा और क्षमता है। युवाओं को व्यसन से दूर रहकर अपने पुरुषार्थ और क्षमता का उपयोग राष्ट्रहित में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में सनातन धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि उनके साथ होने वाली संगोष्ठियों और संवाद कार्यक्रमों में प्रश्न पूछने वालों में युवाओं की संख्या अधिक रहती है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि युवा धर्म और अध्यात्म के प्रति जागरूक नहीं हैं।

इस अवसर पर शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, प्रफुल्ल ब्रह्मचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी, आदेश भूषण पांडेय, डॉ. दिव्यकांत त्रिपाठी, बीपी सिंह, केएन पांडेय, प्रताप दुबे, संतोष त्रिपाठी, नीरज मिश्रा, शुभम सिंह, शशांक गोस्वामी, हर्षित पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शिष्य उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल