सादगीपूर्ण जीवन शैली के हिमायती थे प्रो. डीपी सिंह : डॉ. गौर
मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डीपी सिंह का अस्थि कलश संगम में विसर्जित, श्रद्धांजलि सभा में याद किए गए योगदान
प्रयागराज, 21 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप सिंह (डीपी सिंह) का अस्थि कलश सोमवार को पूरे विधि-विधान के साथ त्रिवेणी संगम में विसर्जित किया गया। उनके पौत्र ऋजु और यजु ने लखनऊ से लाए गए अस्थि कलश को संगम के पवित्र जल में प्रवाहित किया। इस दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। श्रद्धांजलि सभा में लोगों ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद किया। संगम तट पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सबसे पहले प्रो. डीपी सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रो. सिंह केवल शिक्षाविद और प्रशासक ही नहीं, बल्कि सादगी, अनुशासन और मानवीय मूल्यों को जीवन में उतारने वाले व्यक्तित्व थे। प्रदेश सरकार के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह गौर ने कहा कि प्रो. डीपी सिंह सादगीपूर्ण जीवन शैली के सच्चे हिमायती थे। कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए भी उन्होंने आडंबर से दूरी बनाए रखी। उनका जीवन बताता है कि व्यक्ति की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके संस्कार और कार्यों से होती है। मुक्त विश्वविद्यालय को घर-घर तक पहुंचाने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रो. डीपी सिंह ने विश्वविद्यालय की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दूरस्थ शिक्षा को गरीब, वंचित और दूर-दराज के विद्यार्थियों तक पहुंचाने का सपना देखा था। इस कार्य को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
श्रद्धांजलि सभा का संयोजन वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. अनिल कुमार सिंह भदौरिया ने किया। उन्होंने प्रो. सिंह से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व सहज और मिलनसार था। उनका जीवन अनुशासन, त्याग और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित रहा।
मुक्त विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्र ने कहा कि प्रो. डीपी सिंह का विश्वविद्यालय और शिक्षा जगत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने दूरस्थ शिक्षा को अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और शिक्षा के प्रति समर्पण विश्वविद्यालय परिवार के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
इस अवसर पर कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. केपी सिंह, प्रो. बीएन सिंह, प्रो. राधेश्याम सिंह, समर बहादुर सिंह, डॉ. गौरव सिंह गौर, कैप्टन बलवंता यादव, रंजीत बनर्जी सहित अधिवक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे। अंत में प्रो. डीपी सिंह के पुत्र एवं डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. संजय सिंह ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल