रंगमंच समाज को जोड़ने और विसंगतियों पर सवाल उठाने का सशक्त माध्यम : हर्षवर्धन बाजपेयी

 




पाकिटमार रंगमंडल’ ने व्यक्ति के बदलाव और समाज की स्वीकार्यता के द्वंद्व को किया उजागर

प्रयागराज, 17 सितंबर (हि.स.)। रंगमंच समाज को जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक विसंगतियों पर सवाल उठाने का सशक्त माध्यम है। कला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि व्यक्ति के भीतर बदलाव की संभावना भी पैदा करती है। यह बातें शहर उत्तरी के विधायक इं. हर्षवर्धन बाजपेयी ने गुरुवार को कहीं। वह आस्था समिति की ओर से उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में आयोजित ‘पाकिटमार रंगमंडल’ नाटक के मंचन के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

असगर वजाहत द्वारा लिखित और शरद कुशवाहा के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक में समाज के सामने एक गंभीर सवाल रखा गया। कहानी एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जेबकतरी को अपना पेशा बना चुका है। एक दिन वह नाटक देखता है और रंगमंच का प्रभाव उसके जीवन में बदलाव की शुरुआत करता है। वह अपराध की दुनिया छोड़कर रंगमंच से जुड़ता है और अपनी नाट्य मंडली का नाम ‘पाकिटमार रंगमंडल’ रखता है।

नाटक के माध्यम से दिखाया गया कि समाज अपराधी के सुधरने की बात तो करता है, लेकिन उसके बदल जाने के बाद भी उसे उसके पुराने अतीत से मुक्त नहीं करता। यही स्थिति उसके सामने नई जिंदगी शुरू करने में चुनौती बनकर खड़ी होती है। प्रस्तुति ने यह भी सवाल उठाया कि जब कला और रंगमंच किसी व्यक्ति को बदलने की क्षमता रखते हैं तो समाज उसे स्वीकार करने में पीछे क्यों रहता है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. विभा मिश्रा, सहायक निदेशक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि रंगमंच समाज में संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। नाटक में व्यक्ति के परिवर्तन और समाज की स्वीकार्यता के बीच का द्वंद्व प्रभावी ढंग से सामने आया।

वरिष्ठ चित्रकार एवं रंगकर्मी अजामिल व्यास ने कहा कि रंगमंच की ताकत उसके जीवंत संवाद और मानवीय संवेदनाओं में है। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ लोक नाट्यकर्मी अतुल यदुवंशी ने कहा कि भारतीय रंगपरंपरा हमेशा समाज को दिशा देती रही है। वरिष्ठ नाट्य निर्देशक शैलेश श्रीवास्तव ने कहा कि नाटक की सफलता इस बात से तय होती है कि वह दर्शकों के मन में कितनी देर तक बना रहता है।

नाटक में भगवान की भूमिका में हर्षराज पाल, मुन्ना त्यागी के रूप में ऋतिक श्रीवास्तव, आबदा की भूमिका में शालिनी मिश्रा और नसरीन की भूमिका में दिव्या शुक्ला ने प्रभावी अभिनय किया। आयुष केसरवानी, मो. आबिद, सत्यम राय, अजय कुमार, आदित्य कुमार सिंह और वंशिका गिरी का अभिनय भी सराहनीय रहा।

प्रकाश परिकल्पना प्रस्युष वर्सने (रिशु), संगीत संचालन आदित्य कुमार सिंह, रूप सज्जा मो. हामिद, सेट परिकल्पना आरिश जमील तथा पोस्टर-ब्रोशर डिजाइन शहबाज अहमद ने किया।

कार्यक्रम का स्वागत आस्था समिति के महासचिव मनोज कुमार गुप्ता ने किया। संयोजक पंकज गौड़ रहे। अध्यक्ष बृजराज तिवारी और उपाध्यक्ष अनूप गुप्ता ने अतिथियों, कलाकारों और दर्शकों के प्रति आभार जताया। मंच संचालन रंगकर्मी अभिजीत मिश्रा ने किया। विशेष सहयोग वरिष्ठ समाजसेवी एवं रंगकर्मी जमील अहमद का रहा।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल