गुमनामी में महाकवि निराला की आदमकद प्रतिमा, पार्क में फैली गंदगी से साहित्यकारों में रोष
हिंदी दिवस पखवाड़े के बीच यमुना तट पर उपेक्षित मिली प्रतिमा, पार्क को विकसित कर ‘निराला पार्क’ नाम देने की उठी मांग
प्रयागराज, 19 सितंबर (हि.स.)। हिंदी दिवस पखवाड़े के बीच यमुना तट पर बोट क्लब और काली माता मंदिर के पास स्थित महाकवि पं. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की आदमकद प्रतिमा गुमनामी और उपेक्षा का शिकार है। प्रतिमा के आसपास फैली गंदगी और पार्क की बदहाल स्थिति देखकर साहित्य प्रेमियों ने चिंता जताई। प्रतिमा के नीचे लगे शिलालेख से इसकी पहचान हुई।
प्रतिमा की स्थिति की जानकारी मिलने पर कुछ स्थानीय लोगों और साहित्यकारों को इसकी सूचना दी गई। चंडी कार्यालय के व्रतशील को भी इस संबंध में बताया गया। उन्होंने पहले प्रतिमा के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। बाद में मौके पर पहुंचकर उन्होंने भी प्रतिमा और आसपास की स्थिति देखी तो दुख जताया और इसे बेहतर बनाने के लिए प्रयास करने की बात कही।
बताया गया कि यह प्रतिमा वर्ष 2000-2001 के आसपास स्थापित की गई थी। इसके बावजूद आज यह स्थान उपेक्षित पड़ा है। जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों के साथ व्रतशील और अन्य लोगों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर महाकवि निराला को श्रद्धांजलि अर्पित की।
निराला के नाम से विकसित हो पार्क
दुकानजी ने कहा कि प्रयागराज की साहित्यिक पहचान में महाकवि निराला का महत्वपूर्ण स्थान है। शहर के अनेक साहित्यकारों की पहचान निराला से जुड़ी हुई है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई लोगों को इस स्थान पर उनकी प्रतिमा होने की जानकारी तक नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा और उसके आसपास के पार्क का उचित विकास होना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने पार्क की सफाई कराकर उसे सुंदर बनाने की मांग की। व्रतशील ने कहा कि वह इस स्थान को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने के लिए शासन स्तर पर बातचीत कर प्रयास करेंगे।
दुकानजी ने महापौर, नगर आयुक्त और जिलाधिकारी से मांग की कि पार्क का नाम ‘निराला पार्क’ रखा जाए। पार्क के प्रवेश द्वार पर आकर्षक गेट बनाया जाए। प्रतिमा के ऊपर छतरी, पीछे सीढ़ियां और पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था की जाए। साथ ही यहां नियमित सफाई के लिए एक स्थायी सफाईकर्मी की तैनाती की जाए, ताकि महाकवि की प्रतिमा और पार्क की नियमित देखरेख हो सके।
उन्होंने कहा कि साहित्य और संस्कृति की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थान को विकसित कर ऐसा बनाया जाना चाहिए, जहां साहित्य प्रेमी और आम लोग पहुंचकर महाकवि निराला को श्रद्धांजलि दे सकें।
इस अवसर पर व्रतशील शर्मा, धीरज कुमार शर्मा, राजीव ठाकुर, बेबी, प्रवीण कुमार, बेबी जायसवाल, श्रीराम शर्मा, दुर्गेश दुबे, सतीश गुप्ता, शैलेन्द्र मिश्रा, प्रभात मौर्य, शंभुनाथ त्रिपाठी और अंशुल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल