गौरवशाली इतिहास और सामाजिक सम्मान के लिए निकली पासी-पासवान शौर्य सम्मान यात्रा

 




राजीव पासी बोले—शिक्षित बनें, संगठित रहें और अधिकारों के लिए संघर्ष करें

प्रयागराज, 14 अक्टूबर (हि.स.)। पासी-पासवान समाज के गौरवशाली इतिहास, सामाजिक जागरूकता और सम्मान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से बुधवार को प्रयागराज से पासी-पासवान शौर्य सम्मान यात्रा का शुभारंभ किया गया। पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासी के नेतृत्व में निकली यह यात्रा विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करते हुए भदोही पहुंची। यहां ग्राम सभा फत्तूपुर में दलित चौपाल के माध्यम से समाज के लोगों को शिक्षा, एकता और संघर्ष का संदेश दिया गया।

प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासी ने कहा कि समाज की प्रगति का सबसे मजबूत आधार शिक्षा, संगठन और जागरूकता है। उन्होंने लोगों से शिक्षित बनने, संगठित रहने और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज को अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर शिक्षा, सामाजिक एकता और जागरूकता के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। शौर्य सम्मान यात्रा का उद्देश्य समाज के लोगों को उनके इतिहास और गौरव से परिचित कराने के साथ उनमें आत्मसम्मान तथा सामाजिक चेतना का भाव मजबूत करना है।

प्रयागराज से शुरू हुई यात्रा भदोही पहुंचने पर पार्टी कार्यालय में आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान कार्यकर्ताओं के सुझाव भी सुने गए। प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के उत्साह को संगठन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही संगठन का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

इसके बाद यात्रा भदोही विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सभा फत्तूपुर पहुंची, जहां आयोजित दलित चौपाल में समाज की उन्नति, शिक्षा के महत्व और आपसी एकजुटता पर चर्चा की गई। चौपाल के माध्यम से लोगों को सामाजिक जागरूकता के साथ आगे बढ़ने और नई पीढ़ी को शिक्षित बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर प्रदेश महासचिव कमल तिवारी और जितेंद्र पासी, प्रदेश सचिव रामविलास पासी और अवनीश तिवारी, मिर्जापुर मंडल अध्यक्ष विजय राय, भदोही जिलाध्यक्ष राम अवध मिश्रा, भदोही के कार्यकारी अध्यक्ष विजय पासी तथा श्रीमती सीमा सिंह सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल