संत-महात्माओं के जयघोष से गूंजा महानिर्वाणी अखाड़ा, विधि-विधान से मनाई भगवान कपिल मुनि की जयंती
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन और आरती, संतों का हुआ सम्मान; गौ माता के संरक्षण का लिया संकल्प
प्रयागराज, 02 अक्टूबर (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध संगम नगरी के दारागंज स्थित श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में शुक्रवार को भगवान श्री कपिल महामुनि की जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। संत-महात्माओं के जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार से अखाड़ा परिसर भक्तिमय हो उठा। विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रों के साथ भगवान कपिल मुनि का हवन, पूजन और आरती कराई। अखाड़े में मौजूद संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने भगवान कपिल मुनि का स्मरण कर लोककल्याण की कामना की।
कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों के सचिव, महंत, संत-महात्मा और साधु-संत शामिल हुए। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महंत एवं सचिव यमुनापुरी महाराज ने सभी संतों का श्रद्धापूर्वक स्वागत और सम्मान किया। उन्होंने संत-महात्माओं को तिलक लगाकर, माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया और प्रसाद ग्रहण कराया। इसके बाद संतों को सम्मानपूर्वक विदा किया।
जयंती समारोह के अवसर पर अखाड़े में विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। इसमें शहर और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों तथा भक्तों को प्रसाद ग्रहण कराया गया। भक्तों के आने तक भंडारा लगातार चलता रहा।
कार्यक्रम में महंत रघुराज गिरि, मनसुख गिरि थानापति, नारायण पुरी, गोपाल पुरी, अटल अखाड़े के महंत भूधर गिरि महाराज, बाघंबरी मठ के महंत बलवीर गिरि महाराज, आनंद अखाड़े के जगतार मुनि, राजेश्वरानंद सरस्वती, गंगा भवन के गोपाल जी सहित विभिन्न मठों और आश्रमों के संत-महात्मा उपस्थित रहे। रामकृष्ण मिशन और भारत सेवा संघ से जुड़े संतों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, एसडीएम, प्रयागराज के महापौर, पार्षद अनुपमा पांडेय समेत कई पार्षद तथा शासन-प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।
गौ माता के संरक्षण के लिए चलाया हस्ताक्षर अभियान
समारोह के अंत में ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत गौ हत्या की समाप्ति और गौ माता को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। संतों और श्रद्धालुओं ने अभियान में भाग लेकर अपने हस्ताक्षर किए।
महंत यमुनापुरी महाराज ने कहा कि गौ माता सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत अब तक 21 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर कराए जा चुके हैं और अभियान लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से प्राप्त हस्ताक्षरों को भारत सरकार के संबंधित विभागों और न्यायालयों तक भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण सहित सनातन परंपरा में पूज्य सभी देवताओं के जीवन में गौ सेवा और संरक्षण का विशेष महत्व रहा है। गौ माता के संरक्षण के साथ प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा भी जुड़ी हुई है। उन्होंने रासायनिक खाद और उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग को कम कर प्राकृतिक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
महंत यमुनापुरी महाराज ने कहा कि पहले गांवों में गोचर भूमि होती थी, जहां गोवंश के लिए चारे की व्यवस्था रहती थी। उन्होंने सरकार से गोचर भूमि के संरक्षण और गोवंश के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही प्राकृतिक खाद को किसानों के लिए सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था किए जाने पर जोर दिया।
भगवान कपिल मुनि की जयंती पर हुए धार्मिक आयोजन ने श्रद्धा, सेवा और गौ संरक्षण का संदेश दिया। संतों ने सनातन संस्कृति की परंपराओं को आगे बढ़ाने और समाज में सेवा एवं प्रकृति संरक्षण की भावना मजबूत करने का आह्वान किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल