अक्टूबर-नवंबर में बागों को दें पर्याप्त पोषण, मिलीबग से बचाव के लिए तने पर लगाएं पॉलीथीन की पट्टी : डॉ. शैलेंद्र सिंह

 






खुसरोबाग में तीन दिवसीय बागवानी प्रशिक्षण का समापन, पौधों की देखभाल, कीट नियंत्रण और छंटाई की दी गई जानकारी

प्रयागराज, 16 अक्टूबर (हि.स.)। शरद ऋतु में पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है। ऐसे में बागों और फलदार पौधों को स्वस्थ रखने तथा उनकी अच्छी वृद्धि के लिए अक्टूबर और नवंबर में उचित पोषण देना जरूरी है। आम, अमरूद और कटहल सहित कई पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले मिलीबग (गुजिया) कीट से बचाव के लिए तने पर 35 सेंटीमीटर चौड़ी पॉलीथीन की पट्टी लगाकर उसके निचले सिरे पर ग्रीस लगाने की तकनीक भी कारगर है। यह जानकारी शुक्रवार को औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, खुसरोबाग में वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में दी।

उन्होंने कहा कि शरद ऋतु में पौधों का विकास कम हो जाता है। इसलिए अक्टूबर और नवंबर में ही पौधों को उनकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त पोषण देना चाहिए, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर हो सके।

एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पौधों के पोषण प्रबंधन, नर्सरी संचालन, फसल उत्पादन, कीट एवं रोग नियंत्रण, नए बागों की स्थापना, किचन गार्डन और संरक्षित खेती सहित बागवानी से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई।

उद्यान प्रसार निदेशालय, नैनी के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने पौधों के रखरखाव और नवंबर में बागों के पोषण प्रबंधन के बारे में बताया।

कीट विशेषज्ञ डॉ. अनुराग तायडे ने बताया कि मिलीबग का प्रकोप आम, अमरूद, कटहल, गुड़हल और गमलों में लगाए जाने वाले मौसमी पौधों पर भी होता है। शुरुआती अवस्था में यह कीट पौधों की टहनियों पर सफेद रूई जैसा दिखाई देता है। धीरे-धीरे यह पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है और समय पर नियंत्रण नहीं होने पर पौधे को नुकसान पहुंचाता है।

उन्होंने बताया कि मिलीबग और गुजिया कीट के नियंत्रण के लिए पौधों के आसपास की मिट्टी की गुड़ाई और साफ-सफाई जरूरी है। इससे मिट्टी में मौजूद कीटों के अंडों और अन्य अवस्थाओं को नष्ट करने में मदद मिलती है। आम सहित प्रभावित पौधों के तने पर लगभग 35 सेंटीमीटर चौड़ी पॉलीथीन की पट्टी लपेटकर उसे सुतली या प्लास्टिक की डोरी से बांधा जा सकता है। पट्टी के निचले किनारे पर ग्रीस लगाकर उसे अच्छी तरह बंद करने से कीट तने पर चढ़ने से रुकते हैं और ग्रीस में फंस जाते हैं। इससे मिलीबग के प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

कार्यक्रम में सत्यम सिंह और विवेक श्रीवास्तव ने पौधों के कैनोपी प्रबंधन तथा उनकी उचित काट-छांट की तकनीक समझाई। प्रशिक्षण प्रभारी वीके सिंह ने प्रो-ट्रे के माध्यम से नर्सरी में मौसमी पौधे तैयार करने और गमलों के लिए उपयुक्त पॉटिंग मिश्रण बनाने की विधि बताई। उन्होंने कहा कि सही मिश्रण और तकनीक अपनाकर गमलों में भी सब्जियों का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है।

प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और पौध सुरक्षा किट

प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों की परीक्षा और प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें रायबरेली की मोहिनी पटेल तथा प्रतापगढ़ के अंकित, प्रज्ञा और सजल मिश्रा ने सर्वोत्तम अंक प्राप्त किए। उद्यान विभाग की ओर से उन्हें पुरस्कृत किया गया। प्रशिक्षण में सफल प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र के साथ पौधों की सुरक्षा के लिए किट भी उपलब्ध कराई गई।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल