शिक्षा के साथ राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के संस्कार दे रहा एनी बेसेन्ट विद्यालय : गणेश केसरवानी
शताब्दी वर्ष समारोह का भव्य शुभारंभ, विद्यालय की सौ वर्ष की शैक्षणिक यात्रा को बताया गौरवपूर्ण उपलब्धि
प्रयागराज, 01 अक्टूबर (हि.स.)। एनी बेसेन्ट सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ने पिछले सौ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। विद्या भारती से जुड़ने के बाद यह ऐतिहासिक विद्यालय विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जुड़े संस्कार भी प्रदान करेगा। आने वाले समय में विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। यह बातें गुरुवार को छोटा बघाड़ा स्थित एनी बेसेन्ट सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के शताब्दी वर्ष समारोह के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए महापौर गणेश केसरवानी कहीं।
विद्यालय के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ भव्य और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन से हुई। इसके बाद भारतीय शिक्षा समिति पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक शेषधर द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति शेखर यादव ने शिक्षा के नैतिक स्वरूप और विद्यार्थी जीवन में संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना भी है।
विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी ने विद्यालय को शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को विद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. आनंद कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों, आचार्यों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि शताब्दी समारोह के दूसरे दिन दो अक्टूबर को कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें देश और क्षेत्र के प्रमुख कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे।
समारोह में प्रयाग महानगर में विद्या भारती द्वारा संचालित सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य, आचार्य, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के कोषाध्यक्ष डॉ. विनम्रसेन ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल