संस्कृत ज्ञान से सहज ही प्राप्त होती है भारतीय विरासत : पार्थ सारथी सेन शर्मा

 




राज्यस्तरीय संस्कृत सप्ताह के समापन समारोह में विद्वानों और शिक्षकों का सम्मान, प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थी पुरस्कृत

प्रयागराज, 31 अगस्त (हि.स.)। संस्कृत का ज्ञान हमें देश की समृद्ध भारतीय विरासत से सहज रूप से जोड़ता है। आज दुनिया के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत का अध्ययन और शोध हो रहा है। ऐसे में भारत में संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। यह बातें मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सोमवार को जिला पंचायत भवन सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय संस्कृत सप्ताह समापन समारोह में कही।

उन्हाेंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान और परंपरा का महत्वपूर्ण आधार है। इसके अध्ययन से नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकती है। उन्होंने संस्कृत के संरक्षण और इसे अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

संस्कृत से समझ में आता है भारत का जीवन-दर्शन समारोह की अध्यक्षता कर रहे बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि भारत केवल एक भू-खंड नहीं है, बल्कि आचार, दर्शन और जीवन के उत्कृष्ट मूल्यों की भूमि है। भारत की इस विशिष्ट जीवन-दृष्टि और दर्शन को समझने का मार्ग संस्कृत से होकर जाता है। विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त आईएएस एसके पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाने चाहिए। इससे विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ेगी और इसके अध्ययन तथा संवर्धन को गति मिलेगी। विशेष अतिथि और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि किसी भी भाषा का वास्तविक विकास उसके बेहतर अध्ययन और अध्यापन से ही संभव है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित राज्यस्तरीय संस्कृत सप्ताह समापन समारोह-2026 में संस्कृत के विद्वानों, शिक्षकों और विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।

प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थी सम्मानित

समारोह में संस्कृत प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। गीता पाठ प्रतियोगिता में संस्कार ने प्रथम और आयुष ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। गीत प्रतियोगिता में उत्सव त्रिपाठी प्रथम और ओम तिवारी द्वितीय रहे। वहीं अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता में अनमोल ने प्रथम और विवेकानंद ने द्वितीय स्थान हासिल किया।

उप शिक्षा निदेशक (संस्कृत) डॉ. ब्रजेश मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव ओम प्रकाश त्रिपाठी ने तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में संस्कृत को संस्कार का आधार बताया। आयोजन में प्रधान निरीक्षक, संस्कृत पाठशालाएं पवन कुमार श्रीवास्तव का विशेष योगदान रहा।

इस अवसर पर प्रो. सुरेंद्र पाल सिंह, अरविंद शास्त्री, डॉ. विनोद कुमार मिश्र, डॉ. सालिकराम त्रिपाठी, डॉ. अरुणेश मिश्र, यशवंत कुमार द्विवेदी, डॉ. राजेश मिश्र ‘धीर’ और डॉ. मुकेश त्रिपाठी समेत अनेक संस्कृत विद्वानों एवं शिक्षकों को सम्मानित किया गया। समारोह में शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल