अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को लेकर विवाद गहराया, रविन्द्र पुरी एवं हरिगिरि के बयान का खंडन

 




संत समाज ने अखाड़ों की गरिमा और परंपरा बनाए रखने की उठाई मांग

प्रयागराज, 26 जुलाई (हि.स.)। अब अखाड़ा परिषद को लेकर विवाद गहरा गया है। अखाड़े सनातन परंपरा और भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इसलिए इनके संचालन और व्यवस्था में पारदर्शिता, परंपराओं का सम्मान तथा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उक्त बातें रविवार को मीडिया से श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण, मुख्यालय कीडगंज प्रयागराज परिसर में अखाड़े के श्री महंत दुर्गादास महाराज ने कहीं।

उन्होंने कहा कि रविवार को श्री उदासीन निर्मल परिषद के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक हुई जिसमें कथित हरिगिरि और कथित रवीन्द्र पुरी निरंजनी के द्वारा दिए गए भ्रमित दुष्प्रचार का खण्डन करते हुए भारत वर्ष के संतों, महन्तो एवं यहां मण्डलेश्वरों भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सरकार और सभी श्रद्धालु एवं भक्तों को अवगत कराना चाहते हैं कि हरि गिरि, रवीन्द्र पुरी (निरंजनी अखाड़ा) के द्वारा आंकड़ों एवं समाज से निष्कासित एवं स्वयंभू संतों को प्रलोभन के द्वारा एकत्रित कर सरकार एवं समाज को निराधार, खण्डनीय बयानबाजी का समुचित कार्यवाही समाज एवं न्यायलय द्वारा दण्डनीय कार्यवाही करने हेतु प्रस्ताव पारित किया गया। जबकि हरि गिरि को जूनागढ़ गुजरात से समाज से बहिष्कार किया गया है, तथा कार्यवाही जारी है। इसके साथ ही इनके ऊपर तमाम आरोप अखाड़े की सम्पत्ति का खुद ब खुद संतों, महन्तों, महामंडलेश्वरों का शोषण किया जाता रहा है तथा वर्तमान में भी किया जा रहा है। जिसका संत समाज महंतों द्वारा समय-समय से विरोध किया जा रहा है। जिसमें महामंडलेश्वर श्री महंत वर्तमान में आनंद स्वरूप जी हरिद्वार उत्तराखंड एवं अन्य स्थानों से भी होते रहते हैं।

श्री हरि गिरि वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के सदस्य भी नहीं है। तथा इनके द्वारा सिद्ध बाबा मौज गिरि यमुना तट प्रयागराज जो बड़ा उदासीन अखाड़े की सम्पत्ति रही है तथा इनके द्वारा यमुना गंगा तट पर भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों का उल्लंघन करते हुए कई मंजिला नियम विरुद्ध निर्माण कराया गया है, जिसकी जांच सरकार एवं न्यायालय द्वारा कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रवीन्द्र पुरी ( निरंजनी अखाड़ा) भी अखाड़ा परिषद के सदस्य न होते हुए दिग्भ्रमित, दुष्प्रचार करते हुए विभिन्न सोशल मीडिया पर प्रलोभन देकर अपराधिक कार्य कर रहे हैं। इनके ऊपर भी निरंजनी अखाड़े के पूर्व सचिव एवं मन्सादेवी , रामानन्द इन्स्टीट्यूट हरिद्वार एवं अनेक प्रकार के आरोप लगायें गयें है, जिसकी जांच भारत सरकार एवं राज्य सरकार उप्र, उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सरकार द्वारा किया जाना जरूरी है। यह मांग है कि इस प्रकरण की जांच करायी जाय। यह मांग उदासीन निर्मल परिषद एवं वर्तमान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद कर रहा है

प्रयागराज के संत समाज ने विभिन्न अखाड़ों की परंपरा, मर्यादा और धार्मिक गरिमा को बनाए रखने की मांग करते हुए कहा कि अखाड़ों से जुड़े मामलों में सभी पक्षों को साथ लेकर निर्णय किए जाएं। किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान संवाद और आपसी सहमति से होना चाहिए, ताकि संत समाज की एकता और अखाड़ों की प्रतिष्ठा बनी रहे।

संतों ने कहा कि अखाड़ों का उद्देश्य धर्म, संस्कृति, सेवा और समाज का मार्गदर्शन करना है। इसलिए अखाड़ों की गरिमा और ऐतिहासिक परंपराओं को अक्षुण्ण रखना सभी की जिम्मेदारी है।

संत समाज ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि अखाड़ों से जुड़े विवादों का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान कराया जाए तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों, इसके लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

प्रेसवार्ता में उन्होंने बताया कि संत समाज के वर्तमान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, महानिर्वाण अखाड़ा के सचिव श्री महंत रवीन्द्र पुरी जी, उपाध्यक्ष श्री महंत दुर्गादास जी बड़ा उदासीन, महामंत्री निर्मोही अखाड़ा वैष्णव के श्रीमहंत राजेन्द्रदास , कोषाध्यक्ष श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा के श्री महंत ज्ञानदेव सिंह एवं अन्य अखाड़ों के पदाधिकारियों द्वारा कार्य संचालित किया जा रहा है। प्रमुख संत जमुनापुरी महाराज सहित अन्य संत महात्मा उपस्थित रहे। उन्होंने समाज से भी शांति, सौहार्द और धार्मिक परंपराओं के सम्मान की अपील की।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल