भारत केवल भूखंड नहीं, हम सभी के लिए माता का स्वरूप : राजेन्द्र देव त्रिपाठी

 




नई पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना जरूरी

प्रयागराज, 16 सितंबर (हि.स.)। भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि हम सभी भारतवासियों के लिए माता का स्वरूप है। भारतीय संस्कृति में इसे जगज्जननी के रूप में श्रद्धा और सम्मान के साथ देखा जाता है। नई पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का बोध कराना आवश्यक है। यह बातें विद्या भारती के क्षेत्रीय अभियान प्रमुख राजेन्द्र देव त्रिपाठी ने कहीं।

रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, राजापुर में प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह के संयोजन में विद्या भारती की संस्कृति बोध परियोजना को लेकर बैठक आयोजित की गई। इसमें महानगर के विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य और संस्कृति बोध परियोजना के प्रमुख आचार्य शामिल हुए।

राजेन्द्र देव त्रिपाठी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना को समझने के लिए उसके प्राचीन इतिहास और विरासत का अध्ययन जरूरी है। उन्होंने कहा कि संस्कृति बोध परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों और नई पीढ़ी को देश के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना है।

उन्होंने भारत के प्राचीन स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक सीमाओं से अलग भारतीय सभ्यता का सांस्कृतिक विस्तार विभिन्न क्षेत्रों तक रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास और संस्कृति के इस व्यापक स्वरूप की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने संस्कृति बोध परियोजना के अंतर्गत विद्यालयों में होने वाली गतिविधियों में सभी प्रधानाचार्यों और परियोजना प्रमुखों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में देश की संस्कृति और विरासत के प्रति समझ विकसित होने से उनमें अपनी जड़ों के प्रति जुड़ाव मजबूत होगा।

बैठक में विद्यालयों में संस्कृति बोध परियोजना को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इससे जोड़ने पर चर्चा हुई। इस अवसर पर महानगर के सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और परियोजना प्रमुखों से अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल