प्रेम, भक्ति, वैराग्य और परम तत्त्व से मिलन की पाठशाला है भागवत : बटुक महाराज

 




रासलीला जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक, कृष्ण-रुक्मिणी विवाहोत्सव धूमधाम से मनाया गया

प्रयागराज, 05 अक्टूबर (हि.स.)। भागवत कथा प्रेम, भक्ति, वैराग्य, ज्ञान और परम तत्त्व से मिलन की पाठशाला है। रासलीला भागवत की आत्मा है और जीवात्मा-परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इसमें सांसारिक वासना या काम का कोई स्थान नहीं, बल्कि यह विशुद्ध प्रेम और भक्ति की पराकाष्ठा है। यह बातें पूज्य बटुक महाराज ने प्राचीन श्री दधिकांदो मेला कमेटी कृष्णानगर, त्रिवेणी मार्ग, कीडगंज की ओर से श्री ज्ञान पुस्तकालय के प्रांगण में चल रही भागवत कथा के छठवें दिन कहीं।

उन्होंने श्रीकृष्ण की रासलीला का वर्णन करते हुए कहा कि रासलीला को सांसारिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से समझना चाहिए। यह जीवात्मा के परमात्मा से मिलन का संदेश देती है। भागवत मनुष्य को प्रेम और भक्ति के साथ वैराग्य तथा ज्ञान का मार्ग दिखाती है।

कथा के दौरान कंस वध और रासलीला के प्रसंगों का वर्णन किया गया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। विवाह प्रसंग के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन रहे।

मीडिया प्रभारी राजेश केसरवानी ने बताया कि 6 अक्टूबर को भागवत कथा में सुदामा चरित्र, भगवान का स्वधाम गमन और परीक्षित मोक्ष के प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।

कथा के समापन पर महंत यमुना पुरी महाराज, महापौर गणेश केसरवानी, पूर्व पार्षद सविता केसरवानी, मनीष केसरवानी, अजय जायसवाल, रमन गुप्ता, राजेश केसरवानी, खन्ने सोनकर, अमरेश जायसवाल, कृष्णा साहू, अंकुश शर्मा, ईशू केसरवानी सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आरती और पूजन किया।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल