शोध की गुणवत्ता और मौलिकता पर विशेष ध्यान दें शोधार्थी : प्रो. मनमोहन कृष्ण

 




इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क का उद्घाटन

प्रयागराज, 07 अक्टूबर (हि.स.)। शोधार्थियों को बदलते अकादमिक परिवेश के अनुरूप अपनी शोध-दृष्टि विकसित करने के साथ शोध की गुणवत्ता और मौलिकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पूर्वकाल की शोध परंपरा और वर्तमान शोध व्यवस्था में काफी बदलाव आया है। ऐसे में शोधार्थियों के लिए नई परिस्थितियों के अनुरूप शोध के तरीके और दृष्टिकोण को विकसित करना जरूरी है। यह बातें बुधवार को प्रो. मनमोहन कृष्ण, चेयर प्रोफेसर, नीति आयोग ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग में आयोजित प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहीं।

उन्होंने पूर्वकालीन शोध परंपरा से लेकर वर्तमान समय में शोध की बदलती प्रकृति और शोध व्यवस्था पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और मौलिक शोध के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में प्रो. अजय कुमार जेटली, डीन, कला संकाय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पीएच.डी. शोध के दौरान शोधार्थियों द्वारा बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शोध प्रक्रिया में अनुशासन, शोध-नैतिकता, मौलिकता और अकादमिक प्रतिबद्धता का विशेष महत्व है।

कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सरोज यादव के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। अतिथियों का परिचय विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. धनंजय यादव ने कराया।

इस अवसर पर विभाग के शोध जर्नल ‘रिसर्चेज एंड स्टडीज’ के 77वें अंक का विमोचन किया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए डिजिटल कैलेंडर का भी अतिथियों ने उद्घाटन किया। विभाग की ओर से इन दोनों पहलों को शोध और नवाचार को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल बताया गया।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. पतंजलि मिश्र ने अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उद्घाटन सत्र में शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, मौलिक और नैतिक शोध के प्रति जागरूक करने के साथ उनके अकादमिक विकास की दिशा में मार्गदर्शन दिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल