शंकराचार्य की गद्दी कोई राजनीतिक पद नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन समाज के आध्यात्मिक नेतृत्व का सर्वोच्च दायित्व : आशुतोष ब्रह्मचारी

 


प्रयागराज से शुरू हुआ ‘सनातन न्याय यात्रा’ का पूजन एवं संत-आशीर्वाद कार्यक्रम आशुतोष ब्रह्मचारी ने ज्योतिर्मठ परंपरा के संरक्षण का लिया संकल्प

प्रयागराज, 05 जून (हि.स.)। शंकराचार्य की गद्दी कोई राजनीतिक पद नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन समाज के आध्यात्मिक नेतृत्व का सर्वोच्च दायित्व है। कोई कालिनेमी सनातन के ऐसे पवित्र पद पर नहीं बैठने पाएगा। यह बातें शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध प्रयागराज से सनातन न्याय यात्रा’ का शुभारंभ करने से पूर्व मीडिया से वार्ता करते हुए श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण के मुख्यवादी पक्षकार आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कही।

उन्होंने कहा कि इस पवित्र पद पर वही संत विराजमान होना चाहिए जो वेद, उपनिषद और शास्त्रों का प्रकाण्ड विद्वान, निष्कलंक चरित्र वाला, तपस्वी, अराजनीतिक तथा धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित हो।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपराओं, धर्माचार्य व्यवस्था और ज्योतिर्मठ की गरिमा की रक्षा करना प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है। इसी उद्देश्य से देशभर के संत-महात्माओं, अखाड़ों, पीठाधीश्वरों और धर्माचार्यों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि पाकिस्तान से लगातार मिल रही धमकियों, दर्ज एफआईआर और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए पूर्व निर्धारित ‘सनातन न्याय यात्रा’ कार्यक्रम में परिवर्तन किया गया है। अब विभिन्न तीर्थस्थलों पर पूजन-अर्चन, संतों के आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी गतिविधियां संवैधानिक, शांतिपूर्ण और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप संचालित की जा रही हैं।

श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट (पंजीकृत), मथुरा के तत्वावधान में आयोजित ‘सनातन न्याय यात्रा’ के पूजन एवं संत-आशीर्वाद कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को प्रयागराज में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इलाहाबाद न्यूज रिपोर्टर्स क्लब सभागार में आयोजित कार्यक्रम में ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण के मुख्यवादी पक्षकार आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने भगवान आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ (ज्योतिषपीठ) की परंपरा और सनातन धर्म की मर्यादाओं के संरक्षण का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम के तहत शुक्रवार सुबह तीर्थराज प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती का पूजन-अर्चन किया गया तथा ज्योतिर्मठ की पवित्र परंपरा के संरक्षण का संकल्प लिया गया।

ट्रस्ट द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 06 जून को लखनऊ में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज का पूजन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया जाएगा। 08 जून को सिद्धपीठ मां शाकम्भरी देवी धाम, सहारनपुर में दर्शन-पूजन के बाद हरिद्वार में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज का आशीर्वाद लिया जाएगा। वहीं 09 जून से 16 जून तक यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में चारधाम पूजन एवं संत-आशीर्वाद कार्यक्रम आयोजित होंगे।

प्रेस वार्ता में ट्रस्ट के प्रबंधक एवं यात्रा संयोजक ठाकुर सुधांशु सोम ने मीडिया एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए सनातन धर्म, धर्माचार्य परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए समाज से सहयोग और समर्थन की अपील की।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल