संस्कारों और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ना जरूरी : डॉ. राम मनोहर
एनी बेसेंट सरस्वती विद्या मंदिर के शताब्दी समारोह की तीसरी शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी, तोड़िया नृत्य और कृष्ण वंदन रहा आकर्षण
प्रयागराज, 03 अक्टूबर (हि.स.)। एनी बेसेंट सरस्वती विद्या मंदिर के शताब्दी समारोह में भारतीय संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया गया। उक्त बातें शनिवार को समारोह की तीसरे दिन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर ने कहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
एनी बेसेंट सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के शताब्दी समारोह के तीसरे दिन आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की मनमोहक झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। दीप प्रज्वलन क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर, विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व छात्र तथा भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी राकेश रंजन और ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सिविल लाइंस के प्रबंधक आनंद कुमार श्रीवास्तव ने किया।
सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों और विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। पारंपरिक तोड़िया नृत्य और भक्ति से ओतप्रोत कृष्ण वंदन आराधना कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भारतीय कला, परंपरा और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले।
इस अवसर पर एनी बेसेंट सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रबंधक रमेश चंद्र श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रयागराज में विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों के प्रधानाचार्य, आचार्य-आचार्या, विद्या भारती के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक कार्यक्रम में शामिल हुए। एनी बेसेंट कॉलेज के पूर्व छात्र भी सांस्कृतिक संध्या के साक्षी बने।
कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों ने कलाकारों और विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति से जुड़ाव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपस्थित लोगों ने शताब्दी समारोह के तहत आयोजित इस सांस्कृतिक आयोजन की सराहना की।
हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल