शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रधानाचार्यों के सुझाव एवं सहयोग महत्वपूर्ण : केशव प्रसाद मौर्य

 








-अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय वर्तमान समय में अनेक गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे हैं -डॉ. सुखपाल सिंह तोमर

-प्रधानाचार्याें के समक्ष अनेक सेवा-संबंधी, वित्तीय एवं प्रशासनिक कठिनाइयाँ भी उत्पन्न हो रही हैं - डॉ. हरेन्द्र कुमार राय

लखनऊ , 12 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद् के तत्त्वावधान में शनिवार काे गाँधी भवन सभागार, कैसरबाग, लखनऊ में प्रांतीय शैक्षिक उन्नयन संगोष्ठी एवं प्रधानाचार्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रदेश के सभी जनपदों से भारी संख्या में माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, बीएचयू ने की। मुख्य अतिथि केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में उमेश द्विवेदी, एमएलसी, इंजीनियर अवनीश सिंह, एमएलसी, मुकेश शर्मा, एमएलसी, पार्थ सारथी सेन शर्मा, अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा तथा प्रताप सिंह बघेल, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना एवं स्वागत गान ने कार्यक्रम को अत्यंत गरिमामय एवं भावपूर्ण बना दिया।

परिषद् के प्रदेशीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सदस्य डॉ. हरेन्द्र कुमार राय ने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय की शैक्षिक, प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक व्यवस्था की धुरी हैं। बदलते शैक्षिक परिवेश में प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारियाँ निरंतर बढ़ रही हैं, जबकि उनके सामने अनेक सेवा-संबंधी, वित्तीय एवं प्रशासनिक कठिनाइयाँ भी उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों से संगठन की एकजुटता बनाए रखते हुए अपने ज्ञान,अनुभव,विवेक और सूझबूझ से शिक्षा एवं प्रधानाचार्य समाज के हित में निरंतर सक्रिय रहने का आह्वान किया।

परिषद् के संरक्षक डॉ. वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने संगठन की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति उसके सदस्यों की एकजुटता में निहित होती है। उन्होंने प्रधानाचार्यों से व्यक्तिगत सीमाओं से ऊपर उठकर सामूहिक हितों के लिए संगठित होकर कार्य करने का अनुरोध किया।

परिषद् के प्रदेशीय महामंत्री डॉ. सुखपाल सिंह तोमर ने प्रधानाचार्य समाज की समस्याओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय वर्तमान समय में अनेक गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे हैं। विद्यालयों की वित्तीय कठिनाइयाँ, शुल्क की पुरानी दरें, बढ़ती महँगाई, विद्युत व्यय, आर.टी.ई. के कारण छात्र निधि पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा तथा वेतन संबंधी विसंगतियाँ सीधे तौर पर विद्यालयों के सुचारु संचालन एवं शैक्षिक गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं जिनका समाधान सरकार से अपेक्षित है। प्रदेश के सभी जनपदों से आए प्रधानाचार्यों का जमघट इस बात का प्रमाण है कि समस्याएं अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं। इनका समाधान हर हाल में होना ही चाहिए।

संगोष्ठी में उपस्थित अनेक प्रधानाचार्यों ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि विद्यालयों में संसाधनों की कमी, बढ़ती प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ, ऑनलाइन पोर्टलों एवं विभिन्न विभागीय कार्यों का अतिरिक्त भार, छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक संसाधन तथा विद्यालयों की वित्तीय स्थिति जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान आवश्यक है। प्रधानाचार्यों ने शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यालयों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने, विद्यार्थियों में अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों के विकास तथा तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के अवसर बढ़ाने पर भी विचार रखे।

सम्मेलन में तदर्थ एवं कार्यवाहक प्रधानाचार्यों/ प्रधानाध्यापकों के विनियमितीकरण, हाईस्कूल के संस्था प्रधानों की वेतन विसंगतियों के निराकरण, इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को त्रिस्तरीय वेतनमान, वर्तमान महँगाई के अनुरूप विद्यालय शुल्क में संशोधन, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के वाणिज्यिक विद्युत बिल में राहत अथवा घरेलू दर लागू किए जाने, प्रधानाचार्यों की सेवा-सुरक्षा एवं धारा 18 तथा 21 की पूर्व व्यवस्था की पुनर्बहाली, केंद्रीय व जवाहर नवोदय विद्यालयों और अन्य विद्यालयों से आए प्रधानाचार्यों को वेतन संरक्षण, आरटीई के अंतर्गत छात्र निधि से होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति तथा वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए सम्मानजनक सेवा व्यवस्था सहित विभिन्न मांगों पर गंभीरता से विचार-विमर्श हुआ।

उमेश द्विवेदी, एमएलसी ने प्रधानाचार्यों की समस्याओं को गंभीर एवं महत्वपूर्ण बताते हुए उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। द्विवेदी ने शिक्षा के उन्नयन और समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से किए गए अपने प्रयासों पर प्रकाश डाला। इंजीनियर अवनीश सिंह, एमएलसी ने शिक्षा व्यवस्था में प्रधानाचार्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए विद्यालयों की व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। एमएलसी मुकेश वर्मा ने परिषद् द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीर और उचित बताते हुए उनके निराकरण के लिए सहानुभूति पूर्वक सहयोग का आश्वासन दिया।

अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासनिक व्यवस्था एवं शैक्षिक उन्नयन से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में प्रधानाचार्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) प्रताप सिंह बघेल ने भी शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यालयी व्यवस्था एवं विभागीय स्तर पर शिक्षा के उन्नयन से संबंधित विषयों पर विचार रखे।

मुख्य अतिथि केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश ने परिषद् द्वारा उठाई गई समस्याओं एवं मांगों को गंभीरता से सुना। उन्होंने प्रधानाचार्यों की भूमिका की सराहना करते हुए परिषद् की जायज मांगों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए शासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही एवं पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रधानाचार्यों के सुझाव एवं सहयोग महत्वपूर्ण हैं।

सम्मेलन के दौरान परिषद् के प्रदेशीय पदाधिकारियों द्वारा प्रधानाचार्य समाज की विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्य अतिथि एवं संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया।

परिषद् के प्रदेशीय मुख्य संरक्षक देव कृष्ण शर्मा ने अपने संबोधन में विशेष रूप से तदर्थ एवं कार्यवाहक प्रधानाचार्यों/प्रधानाध्यापकों के विनियमितीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि काफी लंबे समय से कार्यरत तदर्थ प्रधानाचार्यों के विनियमितीकरण के मामले में अब और विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। तदर्थ प्रधानाचार्यों का विनियमितीकरण करने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा। सरकार से हमारी पुरजोर मांग है कि तदर्थ प्रधानाचार्यों का विनियमितीकरण अविलंब करने की कृपा की जाये। यदि इस संबंध में अविलंब सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो परिषद् का प्रतिनिधिमंडल माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलकर अपनी मांग को प्रभावी ढंग से रखेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर प्रधानाचार्य परिषद् अपनी जायज मांगों की पूर्ति होने तक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगी।

उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल समस्याओं को उठाने का मंच नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रधानाचार्य समाज की एकता, स्वाभिमान और सामूहिक शक्ति का परिचायक है। सम्मेलन में उपस्थित प्रधानाचार्यों ने भी परिषद् के नेतृत्व में एकजुट होकर शिक्षा एवं प्रधानाचार्य समाज के हित में संघर्ष जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रमाध्यक्ष प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, बीएचयू ने माध्यमिक शिक्षा के उन्नयन और प्रधानाचार्यों की समस्याओं को सरकार द्वारा व्यापक जनहित में अविलंब निराकरण करने का आग्रह किया।उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए आयोजक मंडल को बधाई व्यक्त किया। अंत में सम्मेलन के संयोजक डॉ. महेंद्र नाथ राय ने मुख्य अतिथि, कार्यक्रम के अध्यक्ष, सभी विशिष्ट अतिथियों, प्रदेशीय पदाधिकारियों, प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, छात्राओं एवं आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह