विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रदेशभर में गूंजा एकता का संदेश, मुख्यमंत्री योगी और मंत्रियों ने कांग्रेस पर साधा निशाना
लखनऊ, 14 अगस्त (हि.स.)। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्य सरकार के निर्देश पर प्रभारी मंत्रियों की मौजूदगी में संगोष्ठियां, श्रद्धांजलि कार्यक्रम, मौन पदयात्राएं और विभाजन की त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गईं। कार्यक्रमों में 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए नई पीढ़ी को उस दौर की त्रासदी से परिचित कराने पर जोर दिया गया।
राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक मौन पदयात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने 1947 के विभाजन को मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में एक बताते हुए कहा कि सत्ता के प्रति आतुर कांग्रेस ने देश का विभाजन कराया। योगी ने कहा कि सत्ता के लिए देश के टुकड़े किए गए और लाखों लोगों को विस्थापन तथा हिंसा की पीड़ा झेलनी पड़ी।
प्रयागराज में 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने देश के विभाजन को भारतीय इतिहास का सबसे पीड़ादायक अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि विभाजन का दर्द वही समझ सकता है जिसने उसे प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया हो। इस दौरान लाखों लोगों की हत्या हुई और करोड़ों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को इस ऐतिहासिक त्रासदी और दर्द से अवगत कराना है, ताकि वे इसे कभी न भूलें।
उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर शाहजहांपुर में होमगार्ड विभाग द्वारा आयोजित तिरंगा यात्रा और देशभक्ति कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने देश के स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान को नमन किया और हर घर तिरंगा अभियान के तहत राष्ट्र गौरव की भावना पर जोर दिया।
वाराणसी में प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए कहा कि इससे सीख लेते हुए प्रत्येक भारतीय को राष्ट्रीय भावना को सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
इसके अलावा वर्ष 1947 में भारत-विभाजन की परिस्थितियों को लेकर अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन के जरिए अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से मांग किया कि केंद्र सरकार इस ऐतिहासिक मानवीय विषय पर “राष्ट्रीय विभाजन त्रासदी एवं परिस्थितियाँ जाँच आयोग” का गठन करे।
औरैया जनपद में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहीद पार्क से तहसील तक मौन जुलूस निकाला। जुलूस से पूर्व भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांधी और विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुरादाबाद में यूपी स्टेट कांस्ट्रक्शन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (यूपीसिडको) के अध्यक्ष दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री वाईपी सिंह ने भाजपा कार्यालय पर आयोजित विभाजन विभिषका स्मृति दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में कहा कि शासन की 'फूट डालो और राज करो' नीति और मुस्लिम लीग के दो-राष्ट्र सिद्धांत द्वारा फैलाए गए सांप्रदायिक उन्माद तथा 'डायरेक्ट एक्शन' के दर्दनाक इतिहास पर विस्तार से चर्चा की।
कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 1947 के विभाजन में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी गई और विस्थापित परिवारों के संघर्ष को याद किया गया। मुख्य अतिथि प्रतिभा शुक्ला के साथ विधायक सुरेंद्र मैथानी, विधायक नीलिमा कटियार, विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद अतिथियों ने राजकीय अभिलेखागार की ओर से लगाई गई दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। लघु फिल्म के माध्यम से विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लोगों के पलायन, पीड़ा और संघर्ष को दिखाया गया। प्रदर्शनी में मुस्लिम लीग और तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की भूमिका से जुड़े अभिलेखों के साथ नोआखली और कलकत्ता के सांप्रदायिक दंगों से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गईं। स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
अयोध्या में विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर गुरुवार को अयोध्या में वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान विस्थापन और पीड़ा झेलने वाले परिवारों की स्मृतियों को नमन किया गया। इस अवसर पर सर्किट हाउस से कलेक्ट्रेट गेट तक मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस में विभाजन का दंश झेल चुके परिवारों के सदस्यों के साथ भाजपा पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मौन जुलूस में शामिल लोग हाथों में तख्तियां लेकर चल रहे थे, जिन पर विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और अपने परिजनों को खोने की पीड़ा को दर्शाने वाले संदेश लिखे थे। पूरे रास्ते लोग शांत भाव से आगे बढ़ते रहे। जुलूस के दौरान वर्ष 1947 की उस त्रासदी को याद किया गया, जब लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और लंबे समय तक विस्थापन का दर्द सहा है।
प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रभारी मंत्रियों की मौजूदगी में कार्यक्रम हुए। शासन की ओर से सभी 75 जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। इनमें विभाजन से प्रभावित परिवारों के अनुभव साझा कराने, प्रदर्शनी लगाने तथा विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में परिचर्चा व जागरूकता कार्यक्रम कराने की व्यवस्था की गई थी।
कार्यक्रमों में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को केवल इतिहास का हिस्सा मानकर भुलाया नहीं जा सकता। नई पीढ़ी को उस दौर के विस्थापन, संघर्ष और बलिदान की जानकारी देकर राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रमों का मुख्य संदेश यही रहा कि 1947 की त्रासदी से सबक लेते हुए देश की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा विभाजन से प्रभावित परिवारों की पीड़ा और संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा