पंचवटी से सीता हरण तक की कथा सुन भावुक हुए श्रद्धालु

 


- गडबड़ा धाम में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

मीरजापुर, 07 जून (हि.स.)। हलिया क्षेत्र के गडबड़ा सीतला धाम में आयोजित शतचंडी महायज्ञ एवं संगीतमय रामकथा के पांचवें दिन रविवार को श्रद्धालु भगवान राम के वनवास काल की घटनाओं का श्रवण कर भाव-विभोर हो उठे। परशुराम अखाड़ा प्रयागराज के तत्वावधान में चल रही रामकथा में यज्ञाचार्य धीरज द्विवेदी महाराज ने पंचवटी, शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध और सीता हरण की मार्मिक कथा का विस्तार से वर्णन किया।

कथावाचक ने कहा कि रामायण का यह प्रसंग बताता है कि अधर्म किस प्रकार जन्म लेता है और धर्म हर संकट का सामना कर अंततः विजय प्राप्त करता है। उन्होंने बताया कि पंचवटी में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे थे, लेकिन शूर्पणखा के आगमन के बाद घटनाओं की श्रृंखला शुरू हुई। लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा के नाक-कान काटे जाने से क्रोधित होकर खर-दूषण 14 हजार राक्षसों के साथ युद्ध के लिए पहुंचे, जिनका भगवान राम ने अकेले ही संहार कर दिया।

स्वामी जी ने आगे बताया कि शूर्पणखा ने रावण को सीता के सौंदर्य का वर्णन कर प्रतिशोध के लिए उकसाया। इसके बाद रावण ने मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर पंचवटी भेजा। स्वर्ण मृग के पीछे राम के जाने और लक्ष्मण के कुटिया छोड़ने के बाद रावण ने छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लिया।

कथा के दौरान यज्ञाचार्य ने मर्यादा, संयम और धर्म पालन का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में विवेक और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जटायु उद्धार प्रसंग का भी भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

रामकथा स्थल पर पूरे समय जय श्रीराम के उद्घोष गूंजते रहे। इस अवसर पर महेंद्र बाबा, पूर्व प्रधान शिव गरुड़ तिवारी, पूर्व मंडल अध्यक्ष ज्ञानेश्वर दूबे, दिनेश तिवारी, मंगलधारी मिश्र, ज्ञान शुक्ल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा