नारी शक्ति वंदन अधिनियम युगांतरकारी बदलाव का सूत्रधार : प्रो. बीना सिंह
- 1952 में लोकसभा में महज 22 महिला थीं, अब 33% नारी बनेंगी नीति निर्धारक
मीरजापुर, 13 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के जीडी बिनानी पीजी कॉलेज की पूर्व प्राचार्या प्रो. बीना सिंह ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को सिर्फ एक संशोधन नहीं, बल्कि सत्ता के दरवाजे पर नारी की ठोस दस्तक बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम देश की राजनीति में वर्षों से चली आ रही असमानता पर सीधा प्रहार है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) को भारतीय लोकतंत्र में युगांतरकारी बदलाव का सूत्रधार बताया।
प्रो. बीना सिंह ने साेमवार काे कालेज सभागार में प्रेसवार्ता में कहा कि आधी आबादी अगर फैसलों से बाहर रहेगी तो देश आधा ही विकसित होगा। अब वक्त आ गया है कि नारी केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति निर्धारक बने। प्रो. सिंह ने 1952 में लोकसभा में महज 22 महिलाओं की मौजूदगी और दशकों बाद भी सीमित बढ़ोतरी को सिस्टम की धीमी सोच करार देते हुए कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण इस जड़ता को तोड़ने का काम करेगा। उन्होंने साफ कहा कि जहां महिला नेतृत्व होता है, वहां संवेदनशीलता, पारदर्शिता और परिणाम तीनों साथ चलते हैं। उनके मुताबिक, शिक्षा संस्थानों से लेकर कॉर्पोरेट जगत तक महिलाओं ने हर जगह यह साबित किया है कि वे केवल सहभागी नहीं, बल्कि बदलाव की अगुआ बन सकती हैं।
मिशन शक्ति 5.0 में छात्राओं ने सुनाई संघर्ष से सफलता की कहानी
कार्यक्रम संयोजिका सुनीता शर्मा ने मिशन शक्ति 5.0 को जमीनी बदलाव का मजबूत मंच बताते हुए कहा कि अब लड़कियां सिर्फ सुन नहीं रहीं, बल्कि बोल रही हैं, सवाल कर रही हैं और अपने हक को समझ रही हैं। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने खुलकर अपने अनुभव साझा किए कि किस तरह सामाजिक बंधनों, सुरक्षा की चिंता और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता बनाया। पहले डर था, अब भरोसा है, छात्राओं के इस बदलते आत्मविश्वास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था, हेल्पलाइन, शौचालय और गैस कनेक्शन जैसी सुविधाओं ने महिलाओं के जीवन को बुनियादी स्तर पर बदला है।
अब इतिहास लिखेगी नारी, लोकतंत्र में बदलाव का नया अध्याय
प्रो. बीना सिंह ने अपने संबोधन के अंत में दो टूक कहा कि यह आरक्षण महिलाओं पर उपकार नहीं, उनका अधिकार है। जब नारी निर्णय की मेज पर बराबरी से बैठेगी, तभी भारत सच्चे अर्थों में विकसित राष्ट्र बनेगा। अब नारी इंतजार नहीं करेगी, इतिहास लिखेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा